निर्दलीय विधायक राजा भैया के लिए बेचैन दिख रही भाजपा ! - Pratapgarh Samachar

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रविवार, 30 जुलाई 2017

निर्दलीय विधायक राजा भैया के लिए बेचैन दिख रही भाजपा !


प्रतापगढ़, कुंडा के विधायक व पूर्व सपा सरकार में मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के बीजेपी में शामिल होने की सुगबुगाहट तेज हो गई हैं। अमित शाह के लखनऊ दौरे के दौरान राजा भैया बीजेपी ज्वाइन कर सकते हैं। सूत्रों से पता चला है की राजा भैया के समर्थकों की ओर से तैयारी पूरी हो गई है। बस अब वक्त का इंतजार है जब राजा भैया का दामन बीजेपी आकर थाम ले । माना जा रहा है कि सरकार में उन्हें अहम पद भी मिल सकता है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की कोशिश है कि राजा भैया के सहारे यूपी में ठाकुर वोटबैंक को और मजबूत किया जाय । इसके पहले राजा भैया के करीबी और सपा एमएलसी यशवंत सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देने वालों में बुक्कल नवाब और मुलायम सिंह के करीबी मधुकर जेटली भी शामिल हैं। सपा नेताओं का इस्तीफा बीजेपी ज्वाइन करने के पहले की स्क्रिप्ट का ये हिस्सा है। इन इस्तीफों के पीछे राजा भैया का दिमाग माना जा रहा है। चर्चा तो यह भी है यशवंत सिंह और राजा भैया को योगी मंत्रिमंडल में शामिल किया जायेगा।

बीजेपी ने हमेशा चाहा की राजा भैया उनके होकर रहें

हालांकि ये कोई पहली बार नहीं है जब राजा भैया और बीजेपी की नजदीकियां इस तरह मुद्दा बनी हो। महीने में दो बार सोशल मीडिया पर खबर उड़ती है की राजा भैया बीजेपी में जा रहे हैं परन्तु पुराना इतिहास देखा जाये तो  पहले राजनाथ सिंह की सरकार के दौरान राजा भैया ने बीजेपी को समर्थन दिया था। मायावती वाले मामले में बीजेपी द्वारा साथ न देने की वजह से राजा भैया और उनके पिता को जेल जाना पड़ा | सपा सरकार ने मुद्दा बना राजा को अपने पाले में मिला लिया और चुनावी मुद्दा बना राजपूत व सवर्णों का वोट हासिल किया | हालांकि बाद में सपा की सरकार बनने के बाद राजा भैया और बीजेपी की दूरियां बढ़ गई थीं। बावजूद इसके राजा भैया बीजेपी के कई बड़े नेताओं के संपर्क में रहे। उन्होंने कभी भी मोदी सरकार की खुलकर मुखालफत नहीं की। अभी अभी राष्ट्रपति चुनाव में  राजा भैया ने खुल्लम खुल्ला बीजेपी समर्थित प्रत्याशी को अपना वोट दिया | 
          
        अखिलेश सरकार के दौरान राजा भैया कैबिनेट मंत्री जरूर बने लेकिन जियाउल हक हत्याकांड के बाद सरकार में उनका रुतबा कम हो गया हांलाकि सीबीआई से  क्लीनचिट मिल गयी ।परन्तु तत्कालीन मुख्यमंत्री  अखिलेश के रडार पर आने के बाद वह सरकार में हाशिए पर चले गए। माना जाता है कि सपा में मुलायम खेमे के होने की वजह से अखिलेश यादव उन्हें पसंद नहीं करते लेकिन फिर भी मुलायम अखिलेश वाले प्रकरण में राजा अखिलेश के साथ थे |

 राजा भैया के सहारे ठाकुर समाज को साधने के प्रयास में बीजेपी 

अवध क्षेत्र में राजा भैया का रुतबा किसी से छुपा नहीं है।भले ही मीडिया में या क़ानून में उनकी छवि बेदाग ना हो  इसके बावजूद इसके एक खास वर्ग में राजा भैया का जादू सिर चढ़कर बोलता है। उनकी गिनती यूपी के बड़े नेताओं में होती है और तो और हिंदी भाषी राज्यों में राजा भैया को लोग पसंद करते हैं । ऐसा कई बार हुआ जब सपा सरकार के दौरान राजा भैया ठाकुर नेताओं की अगुवाई करते हुए देखे गए। बीजेपी राजा भैया की अहमियत खूब समझती है। इसलिए उसने अब निर्दलीय राजा भैया को अपने पाले में लाने की कवायद शुरू कर दी है