प्रतापगढ़ के सांसद हरिबंश सिंह बन गए पेटी कॉन्ट्रैक्टर, मानकों के विपरीत हो रहा कार्य - Pratapgarh Samachar

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गुरुवार, 21 सितंबर 2017

प्रतापगढ़ के सांसद हरिबंश सिंह बन गए पेटी कॉन्ट्रैक्टर, मानकों के विपरीत हो रहा कार्य


जिले की राजनीति की भेंट चढ़ा चिलबिला ओवरब्रिज का बचा हुआ निर्माण कार्य, सांसद प्रतापगढ़ भी बने ठेकेदार
   अपना प्रतापगढ़ विकास के मामले में बहुत पीछे हैं क्यों कि वर्षों से नेताओं ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन सही ढंग से नहीं किया है। नेताओं की राजनीति और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा चिलबिला ओवरब्रिज(प्रतापगढ़ का ताजमहल) जिसका बचा हुआ निर्माण कार्य का जिम्मा उठाते  हुए वर्तमान सांसद हरिबंश सिंह ने अपने संसदीय क्षेत्र की गंभीर समस्या मानते हुए शुरू कराया था, यह इनका पहला कार्य था। इसे पूर्ण भी किया यह भी एक उपलब्धि है।
   वहीं अब इनका दूसरा बड़ा कार्य इलाहाबाद-फैजाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग के फुटपाथ को सीमेंटेड ईंट से सुसज्जित करवाना है लेकिन यह इंटरलॉकिंग कार्य कच्छप गति से कराया जा रहा है।
    सांसद पर आरोप है कि इन्होंने अपने रिश्तेदारों और चहेतों को खूब कमवाया है। इसी को लेकर जनसुनवाई पोर्टल IGRS पर जिले के आर.टी.आई. कार्यकर्ता रमेश तिवारी ने शिकायत दर्ज कराई है।
     प्रतापगढ़ के नामी आर.टी.आई. कार्यकर्ता रमेश तिवारी ने आरोप लगाया है कि सांसद ने अपने कार्यकाल में भ्रष्टाचार किया है। कार्य के आवंटित ठेकेदार शकील हैदर के डिफाल्टर होने के कारण, सांसद और उनके भतीजे एवं रिश्तेदार सहित कार्य को निष्पादित करने वाले छोटे-मोटे अन्य चहेते ठेकेदारों द्वारा कार्य कराया जा रहा है। इस तरीके से कार्य कराने से लाभांश कई लोगों में बट रहा है जिससेे निर्माण कार्य में लगने वाले सामान की गुणवत्ता खराब है और मानकों की धज्जियां उड़ाकर कार्य को कराया जा रहा है। इसी गुणवत्ता विहीन कार्य की निष्पक्ष जाँच की माँग उठी है।
     जिले में भुपियामऊ से पॉलटेक्निक तक इलाहाबाद-फैजाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क के दोनों तरफ पटरी फुटपाथ का निर्माण कार्य काफी समय से चल रहा है। यह कार्य नगरपालिका क्षेत्र के अंर्तगत आता है जो कि भंगवाचुंगी से चौक होते हुए चिलबिला तक है। उक्त कार्य का ठेका अनुबंध शकील हैदर के नाम से है, लेकिन शकील हैदर के डिफाल्टर हो जाने के बाद शकील के सभी कार्य एक गुप्त समझौते के तहत प्रतापगढ़ सांसद हरिबंश सिंह ने खुद ले लिया है। चूंकि 10 वर्ष से चिलबिला में रेलवे फाटक पर रेलवे लाइन के ऊपर पुल बनाने के बाद अप्रोच मार्ग के साथ साथ फ्लाईओवर का कार्य व पुल के नीचे की अगल बगल दोनों तरफ की सड़क निर्माण कार्य का अनुबंध भी शकील हैदर ने ले लिया था। सभी को पता है कि चिलबिला फ्लाईओवर के विलम्ब होने से शहर सहित कई जनपदों की जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता था, और जनता ने पुल को प्रतापगढ़ का ताजमहल घोषित कर दिया था। शकील हैदर वाला पूरा ठेका प्रतापगढ़ के सांसद हरिबंश सिंह ने खुद लिया और कार्य सम्पन्न कर रहे हैं।
     चिलबिला फ्लाईओवर की कहानी भी दिलचस्प है। कांग्रेस सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान प्रतापगढ़ से निर्वाचित सांसद अक्षय प्रताप सिंह "गोपाल जी" ने चिलबिला ओवरब्रिज की आधारशिला रखी थी, लेकिन चुनावी साल होने के कारण 2009  का चुनाव अक्षय प्रताप सिंह "गोपाल जी" हार गए और उस वक्त प्रतापगढ़ की सांसद बनी कालाकांकर की राजकुमारी रत्ना सिंह। हालांकि केन्द्र में इस बार भी कांग्रेस की सरकार बनी। कांग्रेस के इस कार्यकाल में तगड़ा कमीशन लेकर एक ही ठेकेदार को कई कार्यों का ठेका दे दिया गया, जिसके कारण भ्रष्ट ठेकेदार डिफाल्टर हो गए। शकील हैदर इस देश का पहला ठेकेदार नहीं है जो डिफाल्टर हुआ है। इन जैसे ठेकेदारों के डिफाल्टर होने का मुख्य कारण जनप्रतिनिधियों और नौकरशाहों द्वारा जबरदस्त कमीशन है। क्यों कि ये ठेकेदारों से कमीशन लेकर एक साथ कई कार्यों का आवंटन अपने ही चहेते ठेकेदार को रेवड़ी की तरह बांट देते हैं।
   इसी तरह जब प्रतापगढ़ सहित अन्य जनपदों में भी नेताओं के चहेते ठेकेदार शकील हैदर ने मोटा कमीशन दे कर कई ठेका ले तो लिया। लेकिन भ्रष्टाचार में डूबी सरकार द्वारा इतना कमीशन ले लिया गया कि शकील हैदर का डिफाल्टर होना तय था। यह तो उसी वक्त तय हो गया था,जब शकील को उनकी औकात से अधिक कार्य का आवंटन कर दिया गया था। जिसका नतीजा ये रहा कि चिलबिला फ्लाईओवर का कार्य समयवधि पर नहीं हो सका।

   फिर वर्ष 2014 में प्रतापगढ़ लोकसभा में अपना दल से जीते हरिबंश सिंह ने चिलबिला फ्लाईओवर का कार्य अपने रिश्तेदार जिसका उपनाम "बाबा" को दिलाकर सम्पूर्ण कार्य अपने भतीजे राणा सिंह को दे दिया और राणा सिंह के दिशानिर्देश में ही चिलबिला फ्लाईओवर का कार्य सम्पन्न हुआ। वही दूसरा कार्य सड़क फुटपाथ का नम्बर आया तो इस कार्य को भी राणा सिंह के दिशा निर्देश में शुरू हुआ। अब इस कार्य में भी तगड़ी लापरवाही बरती गई और इसमें भंगवाचुंगी से चौक तक दोनों पटरियों को जे.सी.बी. लगवाकर उखाड़ दिया गया, जिसकी वजह से टेलीफोन के तार के साथ साथ नगरपालिका के जलकल की पाइप लाइन भी टूट गई। कई नए नए छुट भैये ठेकेदारों को काम मिला था। इन नौसिखिये ठेकेदारों के द्वारा लाखों रुपए की लागत से बिछे तारों और नगरपालिका की पानी की पाइपों को बर्बाद कर दिया जिससे  सरकारी नुकसान हुआ, सिर्फ काली सड़क बची जिसके कारण दिनभर बाईपास विहीन प्रतापगढ़ शहर में जाम के झाम की समस्या से प्रतापगढ़ की आम जनता जूझने लगी। इस तरह पटरियों की दोनों तरफ खुदाई कर देने से कई लोगों को दुर्घटना से चोटें भी लगी।
    अब समस्या इतनी गंभीर है कि शहरी क्षेत्र में शहर और ग्रामीण क्षेत्र की अपार भीड़ आने से नवरात्रि और उसके बाद दहशरा व भरत मिलाप के आयोजन से तगड़ी समस्या हो सकती है।
  ये नेता एवं नौकरशाह मिलकर भूमि पूजन, शिलान्यास और लोकार्पण तो जनता को गुमराह व दिखावे के लिए कर तो देते हैं लेकिन ठेका मैनेज करने और हर ठेके में कमीशन लेने की बात जनता से नहीं बताते हैं।
   आप सभी जानते हैं कि चिलबिला फ्लाईओवर वाला 3 वर्ष का कार्य 13 वर्ष में होने के पीछे इन ठेकेदारों से नेता और नौकरशाहों द्वारा लिया गया मोटा कमीशन ही है जिससे सब कुछ बर्बाद हुआ है।
    जब किसी कार्य में विलम्ब हो जाता है तो वह भारतीय रेल की तरह और अधिक विलम्बित होता जाता है। नेता और अधिकारी जो कार्य आवंटन करते समय मोटा माल लेकर बगल हो लिए होते हैं, वो किस मुंह से उस आवंटित ठेकेदार पर शिकंजा कसे ? यही सबसे बड़ी बिडम्मबना है। ठेकेदार साईट पर चाहे स्याह करे अथवा सफ़ेद। सब रिपोर्ट पास हो जाती है और अंततोगत्वा आराम से भुगतान भी कार्यदायी संस्था कर डालती है। उदाहरण के लिए उक्त कार्य सबसे उपर्युक्त होगा। उक्त कार्य को देख लेने से ही लोगों का सिस्टम से मोहभंग हो जायेगा । मेले के नाम पर इतना घटिया निर्माण किया जा रहा है, जिसकी कोई इन्तहा नहीं है। एक किमी के कार्य में चार पेटी कॉन्ट्रैक्टर लगे हैं। इण्टरलाकिंग ईंट के नीचे चूरा वाली गिट्टी सिर्फ चटाई जा रही है। घटिया बालू का प्रयोग किया जा रहा है। ईंट के नीचे क्रस्ट न होने से सिर्फ मिट्टी वाली बालू में ईंट बिछाते ही वह धंसती जा रही है। उक्त कार्य की लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से निष्पक्ष जांच कराये जाने की मांग की है।