मान्धाता: वैसे तो आजकल शादियों का सीजन ही चल ही रहा है। इसलिए कहीं भी बारात आना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन कल मान्धाता क्षेत्र में आई एक बारात आज पूरे जनपद में चर्चा में है। साथ ही इस बारात ने आज के तड़क-भड़क व दिखावे के जमाने में सादगी की एक मिसाल भी पेश किया है।
शुक्रवार शाम मान्धाता ब्लॉक के दानपुर गाँव में अनोखी बारात सजी। वेदप्रकाश तिवारी ने अपने बेटे प्रदीप का विवाह रवीन्द्रनाथ की बेटी मुदिता के साथ तय किया। यहाँ तक तो सब सामान्य ही था, लेकिन पर्यावरण को ध्यान में रखकर और विवाह व अन्य आयोजनों में बढ़ते हुए अनर्गल फिजूलखर्ची को ध्यान में रखते हुए जब ये बारात बेहद सामान्य तरीके से ले जाने का निर्णय हुआ तब ये शादी अनोखी शादी बन गयी।
विवाह में बुद्धिजीवियों की राय से बारात को सामान्य से भी समान्यतर तरीके से ले जाने की योजना बनी और फिर वो हुआ जिसे आज हर कोई चर्चा कर रहा है और एक मिसाल मान रहा है। दुल्हे के लिए लक्जरी कार की जगह साइकिल सजाई गयी, इसपर सभी बारातियों ने भी साइकिल से ही जाने का निर्णय लिया। फिर तो लगभग तीन किलोमीटर लम्बे रास्ते में हर कोई इस बारात को ही देख रहा था। कन्यापक्ष को सन्देश दिया गया कि बारात बड़ी गाड़ियों की बजाय साइकिल से आ रही है। यहाँ तक की सभी बैण्ड-बाजे वाले भी अपना बाजा साइकिल के कैरियर या कंधे पर लटका कर इस अनोखी और ऐतिहासिक बारात के सहभागी बने।
उधर साइकिल से बारात आने की सूचना सुनकर कन्यापक्ष भी इस अनोखी बारात की अगवानी के लिए अलग ही तैयारी करने लगा। बारात का स्वागत महंगे उपहारों से न करके रुद्राक्ष की माला, पीले अंगवस्त्र व पुष्पों की भेंट देकर किया गया।
उधर साइकिल से बारात आने की सूचना सुनकर कन्यापक्ष भी इस अनोखी बारात की अगवानी के लिए अलग ही तैयारी करने लगा। बारात का स्वागत महंगे उपहारों से न करके रुद्राक्ष की माला, पीले अंगवस्त्र व पुष्पों की भेंट देकर किया गया।
