भरत मिलाप का केंद्र प्रतापगढ़ घण्टाघर बदहाल - Pratapgarh Samachar

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शनिवार, 23 सितंबर 2017

भरत मिलाप का केंद्र प्रतापगढ़ घण्टाघर बदहाल

    
बैनरों से पटा घण्टा घर

 प्रतापगढ़ की पहचान कहे जाने वाला चौक घण्टाघर जो अपने आप में एक इतिहास समेटे हुए है। हर राजनीतिक, व्यावसायिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का केन्द्र घण्टाघर आज बदहाल अवस्था में है और इसपर ध्यान देने वाला कोई नही है।
    वैसे तो पूरा जिला ही बदहाल है लेकिन घण्टाघर की हालत कुछ ज्यादा ही जर्जर है। चुनावी समय आते ही पूरा घण्टाघर बैनर-पोस्टर और होर्डिंगों से पट जाता है, उस समय घण्टाघर होर्डिंग्स की दुकान नजर आता है। नगरपालिका कर्मचारी व जिमेदार इसके लिए कोई प्रयास नहीं करते बल्कि वो खुद बैनर होर्डिंग निर्माताओं से अपना कमीशन लेकर इसके लिए बढ़ावा देते हैं। घण्टाघर की बदहाली के लिये जितना जिम्मेदार नगरपालिका और होर्डिंग के ठेकेदार हैं उतना ही स्थानीय व्यापारी भी, जो ये सब देखकर भी चुप हैं।
     सभी अपना प्रचार यहाँ जरूर करते हैं चाहे वह बैनर हो चाहे विरोध प्रदर्शन हो, धरना घण्टाघर पर ही धरा जाएगा, किसी का पुतला फूँकना हो घण्टाघर ही केंद्र बनता है। लेकिन आज तक किसी भी नेता, व्यापारी, विधायक या मंत्री ने घण्टाघर की पहचान घड़ी को ठीक कराने की जहमत नही उठाई। इसी घण्टाघर के नीचे कुछ समय पहले तक खोवा व्यापारी अपनी दुकानें लगाते थे।
     घण्टाघर इलाहाबाद-फैज़ाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थिति है। यही वो स्थान है जहां प्रतापगढ़ का ऐतिहासिक भारत मिलाप सम्पन्न होता है। लेकिन अभी तक घण्टाघर की न तो सफ़ाई हुई है और न ही मरम्मत। पूरे शहर में सीमेंट ईंट से पटरियों पर इंटरलॉकिंग का काम चल रहा है पर चौक घण्टाघर के राउंडिंग एरिया पर अभी तक इंटरलॉकिंग नही हुई है और न ही घण्टाघर की रंगाई-पुताई हुई है। जबकि हफ्ते भर में ही भरत मिलाप का ऐतिहासिक कार्यक्रम होना है।
    शहर में अध्यक्ष पद के लिए दर्ज़नों लोग लाइन में हैं पर वास्तव में काम करने का होश किसी को नही है।
     श्रीराम लीला कमेटी खुद विवादों से जूझ रही है ऐसे में कमेटी नगरपालिका पर कोई दबाव बना पाएगी इसकी उम्मीद नही लग रही है। दशहरा और भरत मिलाप के लिए नगर पालिका की तरफ से घण्टाघर की रंगाई पुताई और लाइटिंग का कार्य किया जाता रहा है। लेकिन हफ्ते भर में ये कार्य हो पायेगा इसपर संदेह है। इसके लिए कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति बात करने को तैयार नही है।

अगर ध्यान दे नगरपालिका तो यह ऐसे भी ठीक दिखेगा


वर्षों से कोई ध्यान नहीं दे रहा है घण्टाघर को, अगर ध्यान देते तो जैसा चित्र में दिख रहा है वैसे दिखता