बीच मे बहुत दिन से बारिश नही हुई और नहरों में पानी वैसे भी समय पर न आना जिले की बहुत बड़ी उपलब्धि है। जमीन के अंदर पानी का स्तर और ऊपर बिजली का वोल्टेज व सप्लाई बहुत कम है जिसके कारण किसानों के दिलों के सपने और खेतों में फसल मुरझानी शुरू हो गयी थी। कुछ किसान जिनके पास डीजल इंजन का ट्यूबवेल है, वो ही किसी तरह से अब तक अपने खेतों में कामचलाऊ नमी बरकरार रखे हुए थे। पर अब वो भी डीजल जला कर थक चुके थे। इस बीच नवरात्रि की ये बारिश किसानों के लिए माँ का आशीर्वाद लेकर आई है।
इस बारिश में भले ही माँ के पण्डालों में भव्यता और सजावट कम दिख रही हो, लेकिन माँ के भक्तों के लिए उत्साह में कोई कमी नही है। बारिश और तूफान से तमाम जगह पण्डाल या तो पूरी तरह उड़ गए या जर्जर हो गए हैं फिर भी भक्त इसे माँ का आशीर्वाद समझकर खुश हैं। बरसात से किसानों के लिए माँ ने फसल के खजाने खोल दिये हैं।
हालाँकि इस बेमौसम की बरसात ने बहुत नुकसान भी किया है। बहुत से पेड़ और कुछ मकान इस तूफान में ढह गये हैं।
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