फर्जी गिरफ्तारी पर ग्रामीणों में आक्रोश, थाने पर शव रखकर किया प्रदर्शन - Pratapgarh Samachar

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शनिवार, 28 अक्टूबर 2017

फर्जी गिरफ्तारी पर ग्रामीणों में आक्रोश, थाने पर शव रखकर किया प्रदर्शन

 
रानीगंज/फतनपुर/गौरा: गौरा क्षेत्र में पिछले दिनों हुई मारपीट के लिए पुलिस द्वारा निर्दोष लोगों को प्रताड़ित किये जाने व उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही किये जाने के विरोध में ग्रामीणों ने फतनपुर थाने का घेराव कर पुलिस से असली गुनाहगारों का नाम शामिल करने और निर्दोषों को छोड़ने को कहा। ग्रामीणों का गुस्सा देख पुलिस ने उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया तब जाकर ग्रामीण शांत हुए।

     फतनपुर थाना क्षेत्र के गौरा के पास स्थित केवराकलां में 18 अक्टूबर को नहर के पानी को लेकर विवाद हुआ था जिसमें मारपीट हुई थी। लोग बताते हैं कि लाठी व फावड़े से हुई मारपीट में मालती पत्नी ओमप्रकाश यादव को गम्भीर चोटें आई थीं। इलाहाबाद में इलाज के दौरान 25 अक्टूबर की रात मालती की मौत ही गयी। इसके आरोप में ओमप्रकाश यादव ने पुलिस को तहरीर दिया था कि बघेवरा निवासी शिवकुमार यादव, भोजेमऊ के रहने वाले सुशील व बाबूलाल ने उन्हें व उनकी पत्नी को लाठी डंडे व फावड़े से मारा था जिसमे उनकी पत्नी को गहरी चोट लगी। पुलिस ने तहरीर के आधार पर सभी नामजद आरोपियों के घरों पर दबिश देकर रात में ही बाबूलाल व सुशील को गिरफ्तार कर लिया जबकि शिवकुमार घर पर नही मिला था।
       गिरफ्तारी के बाद से ही ग्रामीणों में इस बात को लेकर रोष हो गया था कि पुलिस ने असली गुनाहगारों के बजाय निर्दोषों को गिरफ्तार किया है। 26 अक्टूबर की शाम जब मालती की लाश घर आई तो ग्रामीणों ने उनके घर पर भी ये बात कही और 27 तारीख की सुबह ग्रामीणों ने शव लेकर थाने का घेराव व विरोध प्रदर्शन किया। भीड़ का आक्रोश देख पुलिस के भी हाथ पांव फूल गए और थाने पर पुलिस बल को तैनात किया गया।
      वादी ओमप्रकाश यादव का कहना है कि वो अनपढ़ है और उसने लिखित तहरीर नही दिया था। तहरीर में नाम थाने में ही पुलिस ने लिखा था। उसने बताया कि बाबूलाल व सुशील का नाम उसने लिए ही नही था, वो दोनों पुरी तरह निर्दोष हैं व उनका इस घटना से कोई सम्बन्ध ही नही है। उनके स्थान पर शिवकुमार के पुत्र व पुत्र वधु का नाम उसने बताया था। ग्रामीणों ने पुलिस पर मिलीभगत का आरोप लगाया व शर्त रखी कि जब तक निर्दोषों को छोड़कर असली मुजरिम निर्मला व उसके पति राम कैलाश पर कार्यवाही नही की जाती वो शव का अंतिम संस्कार नही करेंगे। ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए पुलिस ने तहरीर ली व बयान की वीडियोग्राफी करवाकर हिरासत में लिए लोगों को छोड़ा तब ग्रामीणों का गुस्सा कम हुआ और लोग शव को अंतिम संस्कार के लिए ले गए।
       वहीं फतनपुर थानाध्यक्ष कुंवर पुष्पेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि "तहरीर के आधार पर नामजद लोगों को हिरासत में लिया गया था। बाद में जब वादी ने खुद आकर उनके घटना में शामिल नही होने की लिखित जानकारी दी तो उन्हें छोड़ दिया गया। बाकी नाम घटाना व बढ़ाना विवेचनाधिकारी जाँच के दौरान कर सकता है।"