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उन वीर शहीदों को श्रद्धांजली के रूप में हजारो गीतकारो ने अपने देशभक्ति के शब्द पिरोकर संगीत से सजाकर हम सबके बीच में उतारा कई ऐसे भी गीत हैं, जिन्हें हम सुनकर आज भी हमारे देश के यूवा अपने ख्यालों में 71 साल पहले के दौर में चले जाते है और मन में एक रोमांच जग उठता है की काश उस समय हम भी इस आजादी के आन्दोलन में अपनी सहभागिता प्रदान करते। उस समय जब देश का हर वर्ग देश के प्रति अपना योगदान दे रहा था। तब अपने देश का हिंदी सिनेमा भी पीछे नहीं रहा, फिल्म उपकार का यह गीत मेंरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोटी मेरे देश की धरती। फिल्म द लिजेंड ऑफ भगत सिंह का गाना मेरा रंग दे बसंती चोला एक ऐसा गाना है। जो हमें उन सिरफिरे देशभक्तों की याद दिलाता है, जो देश के लिए हंसते-हंसते फांसी पर झूल गए। उस समय भगत सिंह की उम्र 23 साल राजगुरु की 22 साल और सुखदेव की उम्र मात्र 24 साल थी ऐसे देशभक्तों को हम न कोटि कोटि नमन करते हैं। यह दिन हर हिन्दुस्तानी के लिए खास होता है इस दिन हम उन शहीदों को याद जरूर करते है। जिनके बलिदान की वजह आज हम आजाद हैं। महफूज हैं और खुली हवा में सांस ले रहे हैं हालांकि वतन को अपनी जान से ज्यादा चाहने वाले उन मतवालों को याद करने के लिए किसी खास दिन की जरूरत तो नहीं है लेकिन स्वतंत्रता दिवस के दिन हम उन्हें ना याद करें यह कैसे हो सकता है इसके अलावा फिल्म जगत ने देश के प्रति अपने प्राणों की आहुति देने वाले उन जवानों की स्मृति में हजारो गीत समर्पित किये जिन्हें आज भी सुनकर कोई भी देशवासी भाउक हो जाता है ।
15 अगस्त 1947 भारत के इतिहास का वह स्वर्णिम दिन रहा । जिस दिन हमें ब्रिटश शाशन से मुक्ति मिली पर यह मुक्ति ऐसे ही नहीं मिली इसके लिए हमारे देश के लाखों बेटो ने अपनी जान गंवाई कितनी बेटियों की मांगे सूनी हुई कितनी माओ की गोंद सूनी हुई और लाखो बुजुर्गों की बुढ़ापे की लाठी छिनी तब जाकर हम आज आजादी की साँस ले रहे हैं ।यह दिन भारत के महान स्वतंत्रता सेनानियों में बाल गंगाधर तिलक महात्मा गाँधी सुभाष चन्द्र बोश खुदीराम बोश पंडित जवाहर लाल नेहरु चन्द्र शेखर आजाद सरदार भगत सिंह लाला लाजपत राय असफाक उल्ला खान जैसे भारत के बियर सपूत जो हमेआजादी दिलाने के लिए हँसते हँसतेअपने प्राणों की आहुति दे दी। उनको यदा करके उनसे प्रेरणा लेने का दिन होता है जो सिर्फ एक दिन ही नहीं बल्कि साल के तीन सौ पैसठ दिन मनाया जाय तो भी कम है। आज के दौर में हर ब्यक्ति स्वार्थी सा होता जा रहा है। आज के यूवाओं को जैसे नजर लग गयी है धीरे धीरे हम देश पर दी गयी कुर्बानियों को त्यौहार की तरह मानते तो है, पर अगले ही दिन से उसे भूल कर अपने स्वार्थ में जीने लगते है अगर हम उन देश भक्तों को प्रत्येक वर्ष एक दिन यदा करते हैं तो हमें उनसे प्रेरणा लेकर उनके कदमो का अनुसरण भी करना चाहिए जो की आज के यूवाओ में लुप्त सा होता जा रहा है यह देश के लिए गंभीर चिता का बिषय है
आइये हम उन शहीदों को जिन्होंने देश को ब्रिटिश हुकूमत से मुक्ति दिलाने के लिए इन्कलाब जिंदाबाद का नारा लगाते हुए हंस के अपने प्राणों की आहुति दे दी उनको नमन करते हुए यह संकल्प लेते हैं की भविष्य में हम अपने देश के प्रति अपनी आजादी के प्रति उन वीर शहीदों के बताये रास्ते पर चलते हुए देश के लिए हमेशा अपने तन मन और धन से समर्पित रहेंगे यही देश पर मर मिटने वाले उन शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी ।
मेहमान पोस्ट : अनूप पाण्डेय, प्रतापगढ़ द्वारा
