प्रतापगढ़ में अपराध रोकने में सरकार व सरकारी अफ़सर फेल - Pratapgarh Samachar

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शुक्रवार, 27 अक्टूबर 2017

प्रतापगढ़ में अपराध रोकने में सरकार व सरकारी अफ़सर फेल


प्रतापगढ़: देश और प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद लोगों को उम्मीद जगी थी कि प्रदेश के साथ ही शायद जिले में भी अपराध और अपराधियों पर अंकुश लगेगा और सरकार का मुख्य एजेंडा भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना है तो प्रतापगढ़ में भी भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों की नकेल कसी जायेगी जिससे जनता को लाभ होगा परन्तु जिस तरह का रवैया अब तक प्रशासन और सरकारी तंत्र का देखने को मिल रहा है वो बेहद निराशाजनक और शर्मनाक है।
     
    जब देश में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी और जिले को बहुत सालों के बाद भाजपा/अपना दल का सांसद मिला तभी जनपद के लोगों में भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी व अपराधों से निजात मिलने की आस जगी थी। ये आस और मजबूत तब हुयी जब २०१७ के विधानसभा चुनावों में अविश्वसनीय रूप से केंद्र की तरह ही उत्तर प्रदेश में भी पूर्ण बहुमत से भारतीय जनता पार्टी की सरकार योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बनी और जिले से भाजपा अपनादल (एस) के गठबंधन को मिलाकर 3 विधायकों के जीतने के साथ ही दो मंत्री बनाये गए, तब एक बार को लगा की शायद प्रतापगढ़ की बदहाली दूर होने का समय आ गया है। परन्तु हमेशा की तरह ये सब भी सिर्फ ढोल की तरह ही साबित हुआ, अंदर की पोल अभी भी बराबर बनी हुई है।

     प्रदेश में सरकार बनने और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के द्वारा इतनी सख्ती किये जाने के बाद भी जिले में भ्रष्टाचार पर कोई रोक लगती नहीं दिख रही है, चाहे वो बड़े स्तर पर हो या फिर ग्राम पंचायत स्तर पर ग्रामीण विकास की योजनाओं में ग्राम प्रधानों व सेक्रेटरी द्वारा की जा रही रिश्वतखोरी। आज भी लगभग हर गाँव में लोगों को जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र तक के लिए पैसा देना पड़ता है। बाकी अन्य सरकारी योजनाओं के लिए खुला रेट कार्ड चलता है, ऐसा लोगों ने बताया। 

    
सबसे बुरी स्थिति कानून व्यवस्था व अपराधियों पर अंकुश की है। जिले की लगभग हर तहसील व थाना क्षेत्र में अपराध अपने चरम पर है और अपराधी खुलेआम घूमते देखे जा सकते हैं। इसके पीछे कारण चाहे जो हो लेकिन आम जनता के लिए ये बात परेशानी का विषय बन गयी है। यहाँ तक की पुलिस अधीक्षक शगुन गौतम व जिलाधिकारी शम्भू कुमार की सख्ती भी पुलिस को अपराधियों पर लगाम लगाने के लिए तैयार नहीं कर पा रही है। आये दिन हत्याएँ, लूट, राहजनी, बलात्कार आदि की घटनाएँ हो रही हैं और पुलिस सिर्फ जाँच व कार्यवाही का आश्वासन देने के सिवा कुछ नहीं कर पा रही है। कुछ मामलों में पुलिस ने सराहनीय कार्य किया है लेकिन उनकी संख्या बहुत ही कम है व उससे अपराधियों के हौसलों पर कोई फर्क पड़ने की उम्मीद नहीं दिख रही है।

     लगभग पूरे जिले में ही बिना किसी सरकारी आदेश के ही व्यापारियों ने एक रूपये के छोटे सिक्के लेने से मना कर दिया है। हर कोई इस बात से परेशान है, हालाँकि इस मामले में पुलिस ने कुछ जगहों पर कार्यवाही भी किया है, लेकिन उससे किसी पर कोई ख़ास फर्क पड़ा हो ऐसा दिखता नहीं है।


     फिलहाल जनता हमेशा की तरह नेताओं के चुनावी वादों व सरकार और उसकी योजनाओं को असली अमलीजामा पहनाये जाने की प्रतीक्षा करने के साथ ही प्रधानमंत्री जी व मुख्यमंत्री जी के भ्रष्टाचार व अपराध मुक्त भारत के नारे का जनपद में क्रियान्वयन की राह देख रही है।