प्रतापगढ़ : पार्टी से टिकट न मिलने से नाराज होकर जिले में बहुत से प्रत्याशी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। जिले में कई स्थानों पर निर्दलीय प्रत्याशियों की संख्या पार्टी प्रत्याशियों से कहीं ज्यादा है, जो कई जगहों पर न जीतेंगे और न पार्टी प्रत्याशी को जीतने देने के इरादे से मैदान में उतरे हैं। बगावती निर्दलीय प्रत्याशियों ने अब अपना चुनाव प्रचार भी तेज कर दिया है। कुछ निर्दलीय प्रत्याशी जाति के आधार पर तो कई प्रत्याशी नागरिकों के हक के लिए संघर्ष को आधार बनाकर वोट मांग रहे हैं। जिससे राजनैतिक दलों के प्रत्याशियों की नींद गायब हो गयी है। ऐसे प्रत्याशियों को मनाने का भी दौर चल रहा है। लेकिन वे किसी की बात सुनने को तैयार नहीं हैं। उनका दावा है कि जनता उनके साथ है और वह हर हाल में चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे।
नगर निकाय चुनाव के लिए निर्वाचन आयोग ने प्रदेश के 22 राजनैतिक दलों को चुनाव लड़ने की मान्यता दी है। जिले में एक नगर पालिका और आठ नगर पंचायत है। जिले की कुंडा, मानिकपुर व लालगंज को छोड़कर अधिकतर नगर पंचायतों व नगर पालिका में राजनैतिक दलों ने अपने-अपने प्रत्याशी उतारे हैं। वहीं इस बार आम आदमी पार्टी व बहुजन मुक्ति मोर्चा ने भी अपने उम्मीदवार उतारे हैं। हालात यह है कि कई जगहों पर निर्दलीय प्रत्याशी अपने पार्टी के प्रत्याशियों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। कुल मिलाकर निकाय चुनाव में निर्दलीयों ने राजनैतिक पार्टी के उम्मीदवारों का गणित गड़बड़ा दिया है।
चुनाव मैदान में उतरे निर्दलीय अपने वार्ड व आसपास के वार्डों पर तगड़ा असर डाल रहे हैं। खुद को बेहतर बताने के साथ ही वे नागरिकों के अधिकार के लिए किए गए संघर्ष को बयां कर रहे हैं तो कुछ जाति के आधार पर खुद को मजबूत मानते हुए चुनाव मैदान में उतरने के बाद मतदाताओं के घरों पर दस्तक दे रहे हैं। यहां तक कि समझाने वालों को वह टका सा जवाब दे रहे हैं। जिससे राजनैतिक दलों के कैंडीडेटों की नींद उड़ गई है। नाम वापसी के पहले दलों से बगावत कर चुनावी समर में कूदे निर्दल प्रत्याशियों को मनाने का दौर भी चला लेकिन वे कुछ भी सुनने को राजी नहीं हुए। निर्दलीय प्रत्याशियों को अपनी जीत का भी पूरा भरोसा है। अब ये तो आने वाले समय ही बताए पार्टी प्रत्याशी भारी पड़ते हैं या निर्दलीय लड़ने वाले प्रत्याशी, यह देखना दिलचस्प होगा ।
