![]() |
| Photo: वर्तमान सपा जिलाध्यक्ष रामसिंह पटेल और पूर्व जिलाध्यक्ष भैयाराम पटेल |
प्रतापगढ़| समाजवादी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व प्रतापगढ़ से अलग-अलग मिल रही लम्बी शिकायतों के बाद प्रतापगढ़ के सपा के भैयाराम पटेल को जिलाध्यक्ष पद से हटा दिया। और उनके स्थान पर पट्टी विधान सभा से सपा के विधायक रहे रामसिंह पटेल (कुख्यात डकैत ददुआ के भतीजे) को प्रतापगढ़ का नया जिलाध्यक्ष बनाया।
समाजवादी पार्टी द्वारा पूर्व विधायक रामसिंह पटेल को जिलाध्यक्ष बनाने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। चर्चा है कि सपा ने पटेल के स्थान पर पटेल को ही जिलाध्यक्ष बनाकर जातिगत नफा नुकसान को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया गया है। पटेल वोट बैंक को नाराज न करने के मंशा है, सपा ने एक पटेल नेता को हटा कर दुसरे पटेल को जिलाध्यक्ष बनाया है। इससे सपा को आगामी चुनावो में राजनैतिक फायदा भी होगा।
वही भैयाराम पटेल के खिलाफ पार्टी हाई कमान को कई शिकायतें मिल रही थी। उनपर जिले में नगर निकाय चुनावों में रूपये लेकर टिकट देने के आरोप लगे थे, साथ ही साथ पटेल पर नगर पालिका की चेयरमैन सपा प्रत्याशी गीता मिश्र के विरुद्ध लगातार कार्य करने और एक निर्दलीय उम्मीदवार महिमा गुप्ता को समर्थन कर पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने के भी आरोप लग रहे थे। जिसके बाद पूर्व विधायक नागेन्द्र सिंह उर्फ़ मुन्ना यादव और पूर्व मंत्री शिवकांत ओझा व अन्य कई पार्टी पदाधिकारियों ने कई दफा इसकी शिकायत आला कमान को की। आखिरकार पार्टी से बगावत कर नगरपालिका में माहिमा गुप्ता को चुनाव लड़ाना भैयाराम पटेल को महंगा पड़ गया। सपा उम्मीदवार गीता मिश्र के खिलाफ महिला गुप्ता को चुनाव लड़ाने के चलते पूर्व सांसद सी० एन० सिंह को भी पार्टी से 6 साल के लिए निलंबित कर दिया गया था और अब भैयाराम पटेल भी अपनी जिलाध्यक्ष की कुर्सी छोड़नी पड़ रही है।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो अब भैयाराम पटेल में जिला संगठन को सम्भाल सकने की कूवत नहीं बची थी। सामान्य कार्यकर्ता भी भैयाराम के खिलाफ है। साथ ही रामसिंह पटेल को जिलाध्यक्ष बनाये जाने के पीछे पार्टी में बालकुमार पटेल का बढ़ता वर्चस्व भी है।
