![]() |
![]() |
प्रतापगढ़ जिले में पकड़े गये आतंकियों के सहयोगियों की वजह से जिले का नाम खराब हुआ है। उत्तर प्रदेश के आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) ने भारत के खिलाफ पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े 10 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। एटीएस के महानिरीक्षक असीम अरुण बताया की प्रतापगढ़ में छापों और पूछताछ के बाद 2 लोगों को गिरफ्तार किया है। उनके गिरफ्तार होने की बाद स्थानीय पुलिस भौचक्की रह गयी। इन लोगों ने करोड़ों कमा लिए थे। इन्होंने इन पैसों से अपनी शान और शौक़त इन्हीं पैसों से पूरी की, आधा दर्जन लग्जरी गाड़ियों और महंगी सम्पत्तियों के मालिक हैं।
प्रतापगढ़ के दो युवकों ने पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं के लिये 'टेरर फंडिंग में मदद का जुर्म कबूल कर लिया है। असीम अरुण ने बताया कि पकड़े गये लोगों संजय सरोज, नीरज मिश्रा प्रतापगढ़ से हैं, जबकी साहिल मसीह, उमा प्रताप सिंह, मुकेश प्रसाद, निखिल राय, अंकुर राय, दयानन्द यादव, नसीम अहमद तथा नईम अरशद अन्य जगहों से हैं। जिनमें से कुछ लोगों के तार सीधे तौर पर पाकिस्तान से जुड़े हैं।
वहीं संजय सरोज व नीरज मिश्र की बात की जाय तो पहले इनकी माली हालत पतली थी। लेकिन कुछ ही दिनों में देखते ही देखते यह लोग अमीर हो गए। संजय तो करोड़पति और खूंखार भी हो गया, आस पास के लोगों में उसके खिलाफ जाने की किसी की हिम्मत नहीं होती थी।
अरुण ने बताया कि आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का एक सदस्य लाहौर से फोन और इंटरनेट के जरिये अपने नेटवर्क के सदस्यों को सम्पर्क में लिए रहता था और इन लोगों को कहता था कि किसी फर्जी नाम से बैंक खाता खुलवाओ। वह बताता था कि कितना धन किस खाते में डालना है। इसके लिये इन भारतीय एजेंटों को 10 से 20 प्रतिशत कमीशन मिलता था। इस तरह से अभी तक एक करोड़ रुपये से भी ज्यादा के लेन-देन की बात सामने आयी है।
![]() |
पकड़े गए इन सभी 10 लोगों से बड़ी संख्या में एटीएम कार्ड, लगभग 42 लाख रुपये नकद, छह स्वैप मशीनें, मैग्नेटिक कार्ड रीडर, तीन लैपटॉप, एक देसी पिस्तौल और 10 कारतूस, बड़ी संख्या में अलग-अलग बैंकों की पासबुक बरामद किए गए हैं।





