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| राजा भैया यूथ ब्रिगेड के आधिकारिक फेसबुक पेज पर साझा की गई फ़ोटो |
कुंडा विधानसभा में विगत 25 वर्षों आयोजित होने वाले सामूहिक विवाह में इस बार कुछ नया देखने को मिलना तय है। इस बार कार से नहीं बल्कि घोड़े और हाथी की अगुआई में दूल्हों को रथ के साथ बारात घर तक लाया जाएगा। कुंडा के बजरंग महाविद्यालय में आज यानी 16 अप्रैल की शाम 101 दूल्हों की निकलने वाली बारात पहुंचेगी तो बारात की अगवानी कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह (राजाभैया) व एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह (गोपालजी) करेंगे।
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| तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं |
हर बार की तरह इस बार भी 101 दूल्हों की बारात कुंडा की सडक़ों पर निकलेगी जो 2 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए लगभग 3 घण्टे में समाप्त होगी। इस बारात में आकाशीय पटाखे, डीजे और बारातियों की गाड़ियों के अलावां इस बार हाथियों और घोड़ों को भी शामिल किया गया है। हर बार दूल्हे कार से बारात घर पहुंचते थे। लेकिन इस बार सभी 101 दूल्हों के लिए रथ का प्रबंध राजा भइया यूथ ब्रिगेड की तरफ से किया गया है। इस बार लोगों की संख्या अधिक हो सकती है। क्यों कि हाथी और घोड़े आकर्षण का केंद्र होने वाले हैं।
हर बार की तरह इस बार भी 101 बेदी पर दूल्हों को बैठाकर द्वारचार कराया जाएगा। यह द्वारचार की बेला देखते ही बनती है। द्वारचार होने के बाद दूल्हों खाने की व्यवस्था की जाती है जबकि बारातियों को बारात पहुंचते ही भोजन करा दिया जाता है। इसके बाद शुरू होता है विवाह और नंबर का मिलान कर दुल्हन व दूल्हों को मंडप के नीचे बिठाया जाता है। विवाह शुरू होता है और अग्नि को साक्षी मान यह दूल्हा- दुल्हन का जोड़ा नव दाम्पत्य की डोर में बंध जाते हैं। इस सामूहिक विवाह में फेरे और शादी का पूरा कार्यक्रम वैदिक रीति रिवाज से कराया जाता है। दूल्हनों को उपहार स्वरूप गृहस्थी की हर वह वस्तु दी जाती है जो एक नव दम्पति को जरूरी होती है। नवदम्पति को उपहार स्वरूप सुई से लेकर लालटेन, साइकिल, बेड, टीवी, कुर्सी, संदूक, टार्च, शीशा,जरूरी बर्तन, अलमारी, घड़ी, थर्मस, साबुन, पंखा, सूटकेस, एक रामायण, एक राजा भैया की फ़ोटो, एक राम सीता जी के विवाह की फ़ोटो, रेडियो आदि ऐसी बहुत सारी चीजें दी जाती हैं । जिनसे एक नव युगल को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी न हो और उनके घर का माहौल स्वस्थ बना रहे। भारत में ऐसे सामूहिक विवाह बहुत कम देखने को मिलते हैं।
हर बार की तरह इस बार भी 101 बेदी पर दूल्हों को बैठाकर द्वारचार कराया जाएगा। यह द्वारचार की बेला देखते ही बनती है। द्वारचार होने के बाद दूल्हों खाने की व्यवस्था की जाती है जबकि बारातियों को बारात पहुंचते ही भोजन करा दिया जाता है। इसके बाद शुरू होता है विवाह और नंबर का मिलान कर दुल्हन व दूल्हों को मंडप के नीचे बिठाया जाता है। विवाह शुरू होता है और अग्नि को साक्षी मान यह दूल्हा- दुल्हन का जोड़ा नव दाम्पत्य की डोर में बंध जाते हैं। इस सामूहिक विवाह में फेरे और शादी का पूरा कार्यक्रम वैदिक रीति रिवाज से कराया जाता है। दूल्हनों को उपहार स्वरूप गृहस्थी की हर वह वस्तु दी जाती है जो एक नव दम्पति को जरूरी होती है। नवदम्पति को उपहार स्वरूप सुई से लेकर लालटेन, साइकिल, बेड, टीवी, कुर्सी, संदूक, टार्च, शीशा,जरूरी बर्तन, अलमारी, घड़ी, थर्मस, साबुन, पंखा, सूटकेस, एक रामायण, एक राजा भैया की फ़ोटो, एक राम सीता जी के विवाह की फ़ोटो, रेडियो आदि ऐसी बहुत सारी चीजें दी जाती हैं । जिनसे एक नव युगल को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी न हो और उनके घर का माहौल स्वस्थ बना रहे। भारत में ऐसे सामूहिक विवाह बहुत कम देखने को मिलते हैं।
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| उपहार स्वरूप दिये जाने वाले सामान |


