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पुलिस को शक इसलिए था क्यों कि सुनील गुप्ता नाम का यह युवक आपराधिक प्रवृत्ति का था और उसे पुलिस का कोई खौफ़ नहीं था। जंहा तक जानकारी मिली है वह स्थिति के हिसाब से खुद को ढाल लेता था और बेहतरीन एक्टिंग करते हुए लोगों को गुमराह करने में माहिर था। उसने अपने विरोधी पक्ष पर दो बार गोलियां पहले भी चलाई थीं और तो और पुलिसकर्मियों को भी अपनी आपराधिक गतिविधियों से कई बार छका चुका है।
जिस तरीके से देरशाम कोतवाली में उससे पूछताछ होती रही उससे यह साफ था कि पुलिस को यकीन हो चला था कि कहीं न कहीं सुनील गुप्ता किसी न किसी रूप में इस हत्याकांड में शामिल जरूर है और हुआ यही की सुनील ने राज उगल दिया और बताया कि उसके पिता ने हत्या के बाद कैसे सहयोग किया।
लालगंज कोतवाली के समसपुर पूरे हरिकिशुन का छात्र हरदेव यादव उम्र (18 वर्ष) जो कक्षा दस के छात्र था। उसे सोमवार को गांव के समीप ही पूर्व प्रधान शिव बहादुर गुप्ता के घर बगल गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के समय हरदेव यादव के साथ पूर्व प्रधान का पुत्र सुनील गुप्ता भी उपस्थित था। हत्या सुनील ने ही कि थी लेकिन वह जनता, पत्रकार व पुलिस को गुमराह कर रहा था।
सुनील ने कबूला की उसने ही हरदेव यादव की हत्या की है। यह हत्या उससे गुस्से की वजह से हो गई। सूनील ने बताया कि एक दिन उसने हरदेव को अपनी बहन के साथ दीवाल के पीछे बात करते हुए देख लिया था। इस मुद्दे पर सुनील नाराज था। उसने हरदेव यादव से बात की इसमें सुनील का क्रोद्ध और बढ़ गया। उसने अपने पास पहले से रखी पिस्टल से उसके सीने से सटा गोली मार दी जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
हरदेव की मौत के बाद सुनील भागने के फिराक में था। तभी उसका पिता पहुंच गया। दोनों ने पहले पिस्टल छुपाई और तुरंत चिल्लाते हुए यह बताने लगे कि बदमाशों ने हरदेव को गोली मार दी है और ये बदमाश सुनील गुप्ता को मारने आये थे लेकिन गलती से हरदेव को गोली मार दी। यह बात पूरे इलाके में फैल गई। क्योंकि चुनावी रंजिश के कारण पूर्वानुमान था कि सुनील पर हमला हो सकता है तो सबको इस पर विश्वास भी हो गया। लेकिन गोली इतनी नजदीक से मारी गयी थी पुलिस को संदेह था कि दाल में कुछ काला है अतः लालगंज पुलिस ने सुनील को ही सबसे पहले उठा लिया और कड़ाई से पूछताछ की तो सुनील ने हत्या करने की बात कबूल ली।
बड़े बड़े अखबारों ने भी बदमाशों द्वारा की गई हत्या की बात प्रमुखता से छापी थी और इसके पीछे बहुत चलाकी से सुनील ने अपना बयान दिया था। क्योंकि सुनील इसके पहले आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त था और कुछ दिन पहले ही जमानत पर घर आया था। जेल जाने के पहले उसने विरोधियों पर हमला करते हुए कहा था कि दो बार तो केवल वह फायरिंग कर दिया था,जान से मारा नहीं था और इस बार यदि वह जेल से आया तो जरूर विरोधी पक्ष को गोली मार मौत की नींद सुला देगा। इसलिए पूरे इलाके को यह भी विश्वास था कि अब जब सुनील बाहर आया है तो इसके ऊपर भी हमला होना सुनिश्चित है। इसी बात का फायदा सुनील ने उठाया और अपने पिता के साथ मिल कर क्षेत्र के लोगों, पत्रकारों उर पुलिस तक को गुमराह करने में सफल हो गया था।
