प्रतापगढ़ में लगातार हो रही इन घटनाओं का जिम्मेदार कौन ?
मृत श्रद्धालुओं के शवों के साथ किया जा रहा दुर्व्यवहार कौन है जिम्मेदार ?
इतना भयावह हादसा और इतनी भारी संख्या में हुई मौत जिला प्रशासन को अब सख्ती करनी चाहिए। प्रतिदिन 4 से 6 लोग प्रतापगढ़ में दुर्घटनाओं के कारण अपनी जान गंवाते हैं।
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| पोस्टमार्टम हाउस में शवों को जैसे कूड़ा फेंका हुआ था |
टक्कर इतनी भीषण थी कि ऑटो के परखच्चे उड़ गए। उसमें सवार 11 लोगों में से दस की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद चालक ट्रक लेकर भाग गया हैे ।पीछे से आ रहे ऑटो वालों की सूचना पर पिकप भी लौटी और चीख पुकार से कोहराम मच गया। कुछ देर में ही आसपास के थानों की पुलिस भी पहुंच गई और सबसे पहले गंभीर रूप से घायल ऑटो चालक दीपक सरोज को अस्पताल भेजा। फिर मिनी ट्रक से सभी शवों को भी प्रतापगढ़ जिला अस्पताल भेजा गया। शवों के साथ बेअदबी भी की गई।
मरने वालों में एक 43 वर्षीय ऊषा देवी पत्नी अजय कुमार घूरीपुर फतनपुर प्रतापगढ़ की हैं। अन्य सभी गौरैयाडीह के हैं। फिलहाल ऊषा के अलावा आठ वर्षीय पारो पुत्री राजाराम की पहचान हुई है।
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| कई शव घटना स्थल से 10 से 20 मीटर की दूरी पर पड़े मिले |
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| शवों को प्रशासन ने जैसे भूसे की तरह एक मिनी ट्रक में डाल दिया |
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| शवों को देख बिलखते हुए परिजन |
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| मुख्यमंत्री द्वारा दी जा रही मुआवजे की राशि |





