उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मोरंग का एक निश्चित दाम निर्धारित किया गया है लेकिन अभी भी मोरंग का दाम आसमान छू रहा है। मध्यम वर्गीय परिवार के लोग भी घर में नया कमरा या बने घर का प्लास्टर तक करवाने से कतरा रहे हैं। गरीब वर्ग जिनके सिर पर पक्की छत भी नहीं है वह तो इस भाजपा सरकार में अपनी आशा ही खो चुके हैं। इतनी महंगाई में मोरंग कंहा से लायें। मूल्य का निर्धारण होने पर भी हीरे के भाव से कम नहीं है बालू व मोरंग।
प्रतापगढ़ जिले में अवैध रुप से बालू की ढुलाई में सफेदपोश दबंगों का साथ देती है पुलिस। अन्य जिलों से लायी जाने वाली मोरंग व बालू की हेरा-फेरी करने वाले दबंगों द्वारा जिले के बड़े अधिकारी की जेब हमेशा रहती है गर्म।
जिले में मध्यम वर्गीय परिवारों के चहरे लटके हुए हैं । किसी के घर में बेटे का विवाह है तो उसे एक दो कमरे और बनवाने हैं। लेकिन मोरंग की वजह से परिवार के मुखिया की हिम्मत छोटी होती जा रही है। ऐसे कई परिवार ऐसे हैं जिनके घर की दीवाल खड़ी है लेकिन छत के लिये मोरंग खरीदना उनके बस की बात ही नहीं है। बड़ा गड़बड़ झाला है। भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार बिल्कुल कम नहीं हुआ है।
प्रतापगढ़ में प्रधानों व ब्लॉक अधिकारियों को उनका हिस्सा देने के बाद अब प्रतापगढ़ के गाँवों के कुछ गरीबों को आवास तो मिल चुका है लेकिन आवास बनाने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना से मिले धन से केवल मोरंग खरीदी ज सकती है अन्य जरूरी सामान के लिए पैसा ही नही बचता है। प्रधानमंत्री आवास योजना अन्तर्गत लाभार्थियों के खाते में मिलता है 1 लाख बीस हजार रुपये। चालाक प्रधानों व भ्रष्ट अधिकारियों इस 1 लाख 20 हज़ार में से 40 से 50 हज़ार लाभार्थी को धमका कर ले लेते हैं। इसके लिए लाभार्थी पर दबाव बना पहले जी सेटिंग की जाती है। उनको बोला जाता है कि इतना दोगे तभी तुम्हारा नाम आएगा लिस्ट में, यही पूरे प्रतापगढ़ में खेल खेला जा रहा है। अन्ततः लाभार्थी के पास सिर्फ 70 से 80 हजार रुपये ही बचते है।
सरकारी आदेश के तहत साधारण बालू 20 व मोरंग 60 रुपए प्रति फिट है लेकिन इन दामों से दो गुना अधिक में मोरंग व बालू बिक रही है। ठेकेदारों ने मोरंग व बालू का दाम बढ़ा दिया। मोरंग व बालू की किल्लत व मांग को देखते हुए दूसरे घाटों से भी अवैध खनन शुरू हो गया। वैध व अवैध घाटों से पुलिस व राजस्व विभाग के अधिकारियों को उनका हिस्सा पहुंचाकर मनमाने कीमत पर बालू व मोरंग को बेचा जा रहा है।इन्ही वजहों से बालू व मोरंग कीमत आसमान छूने लगी है।
अमीरों को तो कोई फर्क नहीं पड़ता है लेकिन जो गरीब हैं या जो मध्यम वर्गीय हैं, उनके हालात कोई पूछने वाला नहीं है। ऐसे में आवास के निर्माण की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। वहीं पिछली सपा सरकार का थोड़ा बहुत नियंत्रण बालू व मोरंग के मूल्यों पर था उस समय 20 से 25 हजार रूपये मे मार्केट मे अच्छी मोटी मोरंग मिल जाती थी। लेकिन वर्तमान भाजपा सरकार में सबसे बेकार वाली मोरंग भी पचास से साठ रूपये फिट बेची जा रही है।
अभी भी जिले ओवर लोडिंग नहीं बंद हुई है। पिछली सरकार में भी ओवर लोडिंग मोरंग आ रही थी वर्तमान भाजपा सरकार मे भी ओवर लोडिंग मोरंग आ रही है। अंतर सिर्फ इतना है कि पहले मूल्य कम था लेकिन आज बहुत ज्यादा है। वर्तमान सरकार में जो ओवर लोंडिग मोरंग के ट्रक निकलते हैं, उनको चेकिंग के नाम पर सरकारी अफ़सर व पुलिस मिलकर अपनी जेब गर्म करते हैं। जिससे मोरंग व बालू का भाव चढ़ा हुआ है। ऐसे में अब आम आदमी के लिए अपना मकान बनाना कहाँ आसान रह जायेगा। प्रदेश में प्रतापगढ़ की मोरंग और बांदा की मोरंग की डिमांड रहती है। ऐसे में नई खदाने शुरू होने से मोरंग और बालू की आवक बढ़ गयी है, लेकिन दलालों , भ्रष्टाचारी अफसरों व पुलिस की वजह से कीमतों पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। लूट की स्थिति वैसी ही है जैसे पहले थी।
प्रतापगढ़ जिले में अवैध रुप से बालू की ढुलाई में सफेदपोश दबंगों का साथ देती है पुलिस। अन्य जिलों से लायी जाने वाली मोरंग व बालू की हेरा-फेरी करने वाले दबंगों द्वारा जिले के बड़े अधिकारी की जेब हमेशा रहती है गर्म।
जिले में मध्यम वर्गीय परिवारों के चहरे लटके हुए हैं । किसी के घर में बेटे का विवाह है तो उसे एक दो कमरे और बनवाने हैं। लेकिन मोरंग की वजह से परिवार के मुखिया की हिम्मत छोटी होती जा रही है। ऐसे कई परिवार ऐसे हैं जिनके घर की दीवाल खड़ी है लेकिन छत के लिये मोरंग खरीदना उनके बस की बात ही नहीं है। बड़ा गड़बड़ झाला है। भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार बिल्कुल कम नहीं हुआ है।
प्रतापगढ़ में प्रधानों व ब्लॉक अधिकारियों को उनका हिस्सा देने के बाद अब प्रतापगढ़ के गाँवों के कुछ गरीबों को आवास तो मिल चुका है लेकिन आवास बनाने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना से मिले धन से केवल मोरंग खरीदी ज सकती है अन्य जरूरी सामान के लिए पैसा ही नही बचता है। प्रधानमंत्री आवास योजना अन्तर्गत लाभार्थियों के खाते में मिलता है 1 लाख बीस हजार रुपये। चालाक प्रधानों व भ्रष्ट अधिकारियों इस 1 लाख 20 हज़ार में से 40 से 50 हज़ार लाभार्थी को धमका कर ले लेते हैं। इसके लिए लाभार्थी पर दबाव बना पहले जी सेटिंग की जाती है। उनको बोला जाता है कि इतना दोगे तभी तुम्हारा नाम आएगा लिस्ट में, यही पूरे प्रतापगढ़ में खेल खेला जा रहा है। अन्ततः लाभार्थी के पास सिर्फ 70 से 80 हजार रुपये ही बचते है।
सरकारी आदेश के तहत साधारण बालू 20 व मोरंग 60 रुपए प्रति फिट है लेकिन इन दामों से दो गुना अधिक में मोरंग व बालू बिक रही है। ठेकेदारों ने मोरंग व बालू का दाम बढ़ा दिया। मोरंग व बालू की किल्लत व मांग को देखते हुए दूसरे घाटों से भी अवैध खनन शुरू हो गया। वैध व अवैध घाटों से पुलिस व राजस्व विभाग के अधिकारियों को उनका हिस्सा पहुंचाकर मनमाने कीमत पर बालू व मोरंग को बेचा जा रहा है।इन्ही वजहों से बालू व मोरंग कीमत आसमान छूने लगी है।
अमीरों को तो कोई फर्क नहीं पड़ता है लेकिन जो गरीब हैं या जो मध्यम वर्गीय हैं, उनके हालात कोई पूछने वाला नहीं है। ऐसे में आवास के निर्माण की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। वहीं पिछली सपा सरकार का थोड़ा बहुत नियंत्रण बालू व मोरंग के मूल्यों पर था उस समय 20 से 25 हजार रूपये मे मार्केट मे अच्छी मोटी मोरंग मिल जाती थी। लेकिन वर्तमान भाजपा सरकार में सबसे बेकार वाली मोरंग भी पचास से साठ रूपये फिट बेची जा रही है।
अभी भी जिले ओवर लोडिंग नहीं बंद हुई है। पिछली सरकार में भी ओवर लोडिंग मोरंग आ रही थी वर्तमान भाजपा सरकार मे भी ओवर लोडिंग मोरंग आ रही है। अंतर सिर्फ इतना है कि पहले मूल्य कम था लेकिन आज बहुत ज्यादा है। वर्तमान सरकार में जो ओवर लोंडिग मोरंग के ट्रक निकलते हैं, उनको चेकिंग के नाम पर सरकारी अफ़सर व पुलिस मिलकर अपनी जेब गर्म करते हैं। जिससे मोरंग व बालू का भाव चढ़ा हुआ है। ऐसे में अब आम आदमी के लिए अपना मकान बनाना कहाँ आसान रह जायेगा। प्रदेश में प्रतापगढ़ की मोरंग और बांदा की मोरंग की डिमांड रहती है। ऐसे में नई खदाने शुरू होने से मोरंग और बालू की आवक बढ़ गयी है, लेकिन दलालों , भ्रष्टाचारी अफसरों व पुलिस की वजह से कीमतों पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। लूट की स्थिति वैसी ही है जैसे पहले थी।

