वैसे तो किसी भी रेलवे स्टेशन और उसके आसपास की दुकानों पर जागरूक एवं प्रबुद्ध वर्ग के उपभोक्ता खाने पीने से बचते हैं। यदि बहुत ही आवश्यक हुआ तो सीलबंद खाद्य सामग्रियों को प्राथमिकता देते है।इसका कारण साफ़ है कि खाने पीने की वस्तुओं के निर्माण मे मानकों का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा जाता है।
यह चित्र जनपद प्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर. 2 पर पकने वाली आलुओं की है जिनसे तैयार वस्तुएं जैसे टिकिया,समोसा,ब्रेड पकौड़ा,सब्जी आदि को यात्रा के दौरान यात्रियों को मजबूरी में खरीदना ही होगा उसके बाद वो उसे खायेंगे ऐसी स्थिति में यात्रियों का बीमार होना स्वभाविक है।
जैसा कि रेलवे स्टेशन परिसर के अन्दर खानपान की वस्तुओं को यात्रियों में बेंचे जाने के लिये बड़ी नीलामी प्रक्रिया से ठेका मिलने के बाद ठेकेदार द्वारा अपने व्यक्तिगत आदमियों के द्वारा सामानों की आपूर्ति स्टेशन पर करवाता है। अधिक पैसा कमाने के चक्कर में ठेकेदार के लोंगों द्वारा घटिया सामानों का प्रयोग करता है । स्टेशन पर इस तरह घटाया सामाग्री की आपूर्ति पर कब शिकंजा कसेगा। इस बात का प्रतापगढ़ की जनता के साथ-साथ यहाँ से होकर यात्रा करने वाले यात्रियों को भी इंतज़ार है।
यह चित्र जनपद प्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर. 2 पर पकने वाली आलुओं की है जिनसे तैयार वस्तुएं जैसे टिकिया,समोसा,ब्रेड पकौड़ा,सब्जी आदि को यात्रा के दौरान यात्रियों को मजबूरी में खरीदना ही होगा उसके बाद वो उसे खायेंगे ऐसी स्थिति में यात्रियों का बीमार होना स्वभाविक है।
जैसा कि रेलवे स्टेशन परिसर के अन्दर खानपान की वस्तुओं को यात्रियों में बेंचे जाने के लिये बड़ी नीलामी प्रक्रिया से ठेका मिलने के बाद ठेकेदार द्वारा अपने व्यक्तिगत आदमियों के द्वारा सामानों की आपूर्ति स्टेशन पर करवाता है। अधिक पैसा कमाने के चक्कर में ठेकेदार के लोंगों द्वारा घटिया सामानों का प्रयोग करता है । स्टेशन पर इस तरह घटाया सामाग्री की आपूर्ति पर कब शिकंजा कसेगा। इस बात का प्रतापगढ़ की जनता के साथ-साथ यहाँ से होकर यात्रा करने वाले यात्रियों को भी इंतज़ार है।
