जेठवारा में धर्मांतरण का गन्दा खेल, प्रशासन जानकर भी बेखबर - Pratapgarh Samachar

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सोमवार, 25 सितंबर 2017

जेठवारा में धर्मांतरण का गन्दा खेल, प्रशासन जानकर भी बेखबर


     प्रतापगढ़ जिले में भी धर्मपरिवर्तन की बात सामने आई है। जेठवारा थाना क्षेत्र के एक गाँव में बीमारी दूर करके स्वस्थ करने के नाम पर झाड़-फूँक के बहाने लोगों को उन्हें उनके धर्म से विरक्त किया जाता है, जिसमें भोले-भाले ग्रामीण विशेषकर महिलाएं आसानी से झाँसे में आ जाते हैं। धर्मांतरण की सूचना पर पहुंची पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में ले लिया।
      आरोप है कि जेठवारा थाना  क्षेत्र के पतुलकी पांडेय का पुरवा गाँव में धर्मांतरण का ये खेल खुलेआम चल रहा है और पुलिस व प्रशासन को इसकी खबर भी नही है। गाँव का ही राकेश चौहान आराधना के साथ चंगाई करता है। उसके यहाँ अंधविश्वास में फँसे लोग इलाज के लिए आते हैं। यहाँ हिन्दू धर्म की बुराइयाँ करके लोगों को बहलाया जाता है और उनका धर्म परिवर्तन किया जाता है। रविवार को भी वहाँ बहुत से लोग इलाज के लिए आये थे। जहाँ कुछ लोगों ने पहुँचकर इस अवैध कार्य के लिए रोका तो राकेश ने लोगों को अपशब्द कहे जिसके बाद लोग उग्र हो गए और हंगामा होने लगा। खबर सुनकर जेठवारा पुलिस मौके पर पहुँची और राकेश समेत दो लोगों को थाने लाकर पूछताछ करने लगी, तभी भारी सँख्या में लोगों ने थाने पर इकट्ठा होकर हंगामा करना शुरू किया। पुलिस ने लोगों को शांत कराने का प्रयास किया लेकिन लोग कोई बात मानने को तैयार नही थे। इसपर पुलिस ने डंडा पटककर लोगों को बाहर खदेड़ा, भागते वक्त गिरने से कई लोगों को चोटें भी आई। थाने से निकलकर भीड़ बाजार पहुँच गयी।
     बताते हैं कि राकेश के घर दोपहर तक चंगाई का ये कार्यक्रम चलता है, जिसके बाद विशेष प्रार्थना सभा होती है। इस दौरान लोगों को ईशा के बारे में विस्तार से बताया जाता है और फिर बाद में लँगर चलता है जिसे दूर दराज से आये लोग प्रसाद समझकर ग्रहण करते हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक यहाँ पर लोगों को हिन्दू धर्म की बुराई की जाती है और उन्हें जाति व भेदभाव के नाम पर मानसिक रूप से हिन्दू धर्म के विपरीत ले जाया जाता है, जिसके बाद उन्हें धर्म विशेष की दीक्षा दी जाती है। साथ ही यहाँ आने वाले लोगों को चेतावनी दी जाती है कि वो यहाँ हुई बातों की चर्चा बाहर कहीं न करें, नही तो प्रभु उनसे नाराज हो जाएंगे और उनकी बीमारी सही नही होगी। लोगों ने बताया कि यहाँ आने वाले गरीबों को धन का लालच भी दिया जाता है।
      धर्मांतरण की खबर पर पहुँची पुलिस ने राकेश के घर के तलाशी ली। तलाशी में प्रार्थना सभा कक्ष में सम्प्रदाय विशेष की धार्मिक पुस्तकें मिलीं और बीमार लोगों के इलाज (चंगाई) के लिए मुफ्त दवा के नाम पर दिया जाने वाला झाड़फूंक वाला जल भी मिला। लोगों ने बताया कि पहले तो आम लोगों को बहला-फुसलाकर उनका मन हिन्दू धर्म से हटाने का प्रयास किया जाता है। सफलता न मिलने पर उन्हें धन का लालच भी दिया जाता है।
    राकेश से पुलिस ने पूछताछ किया लेकिन कोई बयान नही दिया। सवाल ये है कि धर्मनिरपेक्ष देश मे इस तरह अन्जाने में बहलाकर धर्म परिवर्तन कितना जायज है। पुलिस की नाक के नीचे अंधविश्वास के नाम पर लोगों के धर्मांतरण का ये खेल होता रहा और पुलिस कुम्भकरणी नींद सोती रही।