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| सई नदी में आता एक गंदा नाला जो माँ बेल्हा मंदिर के बगल से ही होकर बहता है। |
आज साफ़ सफाई के मामले में देखे तो प्रतापगढ़ एक गंदे शहरो में से एक है जो की सरकारी तथ्यों पर प्रमाणित भी हुआ है। अभी हाल ही कि एक सरकारी रिपोर्ट में प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश का सबसे पिछड़ा जिला घोषित किया गया है।
जनप्रतिनिधि जीतने के बाद अपना कर्तव्य भूल जाते हैं तथा जुट जाते है वह अपनी संपत्ति बढ़ाने तथा सम्मान कमाने में। उन्हें जिले से वो स्नेह ही नहीं है जो एक आम प्रतापगढ़िया नागरिक को है।
आज अगर थोड़ी सी भी बारिश हो जाए तो पूरा प्रतापगढ़ जलमग्न हो जाता है, जिसमे गंदी नालियों का पानी रोड पर आता है उसी गंदे पानी में लोगों को होकर जाना पड़ता है, ये तो शहर की बात थी जिले की तमाम छोटे बड़े मार्केट में भी साफ़ सफाई पर कोई जागरूकता नहीं है। वहां भी गंदगी वैसी है जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए।
आइये अब बात करते है नदियों की सई नदी प्रमुखता से पुरे जिले को जोड़ती है, पूरे शहर का कूड़ा तथा सीवर का पानी भी इसी नदी में गिरता है। अगर यही होता रहा तो पहले से ही प्रदूषित यह नदी अत्यधिक प्रदूषित होकर जहरीली हो जाएगी और आस पास के गांव के लोग भयानक बीमारी के चपेट में आ जाएंगे, क्यों कि भूमि से जो जल वो निकाल कर पीते हैं वो जल सई नदी का होता है। और ये कई बार हुआ भी जब नदी में बिना किसी कारण के ही मछलियाँ मर गई हैं।
रेलवे स्टेशन जो की गंदे स्टेशन में प्रमुखता से सबसे आगे है उत्तर प्रदेश में, इसी के साथ साथ यदि आप उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के बस अड्डे पे जाएं तो वहां भी गंदगी का अम्बार लगा पड़ा है, शौचालय की सुविधा न के बराबर है या सीधे शब्दों में कहें तो है ही नहीं ऐसा आखिरकार क्यों है?
अब आप सब ही बतायें ऐसा क्यों है ? ऐसा स्वार्थी अधिकारियों की वजह से है, नेताओं की वजह से या सब कुछ हमारी ही गलती है।
सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि सरकार द्वारा सफाई के लिए भेजा जा रहा पैसा, जिले भर के हजारों सफाई कर्मचारी, सफाई के लिए लगने वाले संसाधनों (ठेले से लेकर जेसीबी, ट्रक, छोटी गाड़ियाँ) आदि के लिए आने वाला फण्ड ये सब कहाँ जा रहा है। हर साल वेतन बढ़ाने के लिए हड़ताल करने वाले सफाई कर्मचारी जो सिर्फ यूनियन बाजी और हड़ताल के समय ही दिखाई देते हैं ये सब काम के समय कहाँ छुप जाते हैं।
जिम्मेदारों का ये फ़र्ज नही बनता क्या की वो इनपर कार्यवाही करें और काम व जिले के विकास में अपनी सहभागिता दें।
सभी जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी माल काटने में लगे हुए हैं। जनता जागरूक नहीं है। सफाई कर्मचारी को प्रधान और अन्य ताक़तवर लोगों के घर की साफ सफाई से फुरसत नहीं मिलती है।
: मनीष त्रिपाठी के द्वारा।
