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| लोगों के बीच बैठी पुलिस, सूझबूझ से पुलिस व प्रबुद्धजनों ने स्थिति सम्हाली |
लालगंज अझारा क्षेत्र के खलसा सादात चौराहे पर पंडाल मे पूरी रात युवाओं ने की नारेबाज़ी!
खलसा,लालगंज आझारा। प्रबुद्धजनों के सहयोग की वजह से साम्प्रदायिक हिंसा टल गई। जहां बहुसंख्यक समुदाय का कहना था लालगंज के समुदाय विशेष के अराजक तत्वों द्वारा गुरुवार को दुर्गापूजा पंडाल में धार्मिक कार्यक्रम करने पर परिणाम भुगतने को तैयार रहने की धमकी दी गयी थी। जिससे सदा शान्त रहने वाले पूरे क्षेत्र में तनाव व्याप्त हो गया। हुआ ये कि स्थानीय युवाओं ने व्हाट्सएप, फेसबुक पर शाम को उक्त स्थान पर एकत्रित मुहिम चलाई थी। जिसकी वजह से 2000 से अधिक युवा पंडाल के पास शाम से लेकर देर रात 3 बजे तक उपस्थित रहे। पूरी रात नारेबाज़ी होती रही, स्थिति इतनी विकट थी यदि दूसरा समुदाय आगे आता तो पुलिस को स्थिति सम्हालने में हांथ पांव फूल जाते।
लालगंज चौराहे से डेढ़ किलोमीटर आगे घुइसरनाथ रोड पर खलसा चौराहे पर दुर्गा पूजा पंडाल के सामने की सड़क पर बल्ब की झालरों को लगाने का विरोध स्थानीय मुसलमानों ने किया था। उस समय स्थानीय व्यापारियों और प्रबुद्धजनों के हस्तक्षेप से मामला शांत हो गया था और पंडाल पर विधिवत पूजा अर्चना का कार्यक्रम हो रहा था। लेकिन उस समय अपने मंसूबों में नाकाम रहने वाले शरारती और असामाजिक तत्वों ने धमकी दे दी कि कि यदि कार्यक्रम हुआ तो यहाँ खून बहेगा, अब जब मोहर्रम आ चुका है तो उसके और साथ ही भी अष्टमी-नवमी भी थी जिसकी वजह से पण्डालों में विशेष पूजा का आयोजन होता है, अराजक तत्वों ने पूजा समिति के लोगों को स्पष्ट धमकी दी थी कि शांति से पूजा करो और सड़क के ऊपर से लगी झालर हटाओ नहीं तो गम्भीर अंजाम भुगतने को तैयार रहो। लोगों का यह भी कहना है कि यह युवाओं का हुजूम इस लिए इक्कठा हुआ था क्यों कि एक नवनिर्मित भवन से पाकिस्तान जिंदाबाद, हिन्दुस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए गए थे जो कि सहन नहीं किया जा सकता है।
रात में जब युवाओं का हुजूम इकट्ठा हुआ तो उनकी आड़ मे कतिपय आसामाजिक तत्वों द्वारा विशेष समुदाय द्वारा लगाए गए झंडों को तोड़ दिया गया जिससे दंगा कराकर विशेष राजनीतिक लाभ लिया जा सके।
लालगंज कोतवाली का पूरा प्रशासनिक अमला व एक ट्रक पी.ए.सी जवानों ने मोर्चा सम्हाल रखा था। उसके बाद भी पूरी रात आक्रोशित युवाओं ने नारेबाज़ी की जिसके लिये कुछ युवाओं को पुलिस की लाठी का भी शिकार होना पड़ा।
कुल मिलाकर कहा जाय कि बुद्दिजीवी लोगों ने जिम्मेदारी ली और किसी भी तरीके का बवाल होने से पूरे क्षेत्र को बचा लिया।
इतना होने के बाद आज सुबह से स्थिति गंभीर है परसों मुहर्रम का त्योहार मनाया जाएगा। यदि प्रशासन और प्रबुद्ध जान ऐसे ही मुस्तैद रहे तो किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना होने से शांतिप्रिय लालगंज अझारा क्षेत्र को बचाया जा सकता है।
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| शाम के समय एकत्रित होते युवक |
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| शांति से सम्पन्न होता धार्मिक कार्यक्रम |
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| नारे बाज़ी करते युवा |



