प्रतापगढ़ निकाय चुनाव नजदीक है जिसकी वजह से हर प्रत्याशी अपने कार्यकर्ताओं को दारू और पैसा देकर बुच्च रखना चाहता है। इससे भी बड़ी बात की खुलेआम 500 और हज़ार देकर वोट खरीदा जा रहा है। नगर पालिका हो या नगर पंचायत दारू और पैसा ही चुनाव जितवा सकता है यही कटु सत्य है । इसी बात का पूरा फायदा शराब माफ़िया ले रहे हैं। प्रतापगढ़ जिले के कई पुलिस थाने बराबर इन शराब माफियाओं से महीनवारी लेते हैं। जिसका रेट 50000 से 100000 के बीच में है। मतलब यह है कि यदि आप शराब माफ़िया हैं तो आप गैर प्रांतीय शराब आराम से प्रतापगढ़ में लाकर बेंच सकते हैं।
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आइये अब बताते हैं कि शराब माफ़िया लोग बनते कैसे हैं । मान लीजिये एक शराब की छोटी बोतल उत्तर प्रदेश में 180 रुपये मिलती है और हरियाणा से यदि कोई वही शराब की बोतल ले तो 100 रुपये में ही वही ब्रांड और वही स्वाद की शराब मिल जाती है। शराब माफ़िया बनने के लिए आपके पास हुनर होना चाहिए और किसी नेता या नेती या अफसर का हाथ बस फिर क्या 100 रुपये वाली हरियाणा की शराब उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में 180 कई बेंचिये बस लेवल ही तो बदलना होता है और मुनाफा होता है भयंकर। अब माना कि आप करोङों का शुद्ध लाभ कमा रहे हो तो काहे किसी से डरोगे जब नेता, अधिकारी, थाने बिकने को तैयार बैठे हैं। बस 100000 थाने में दे दीजिए 1000000 अधिकारी स्तर पर और 2500000 नेता नेती को बाकी 6500000 की शुद्ध बचत घर ले जाएं या अपना व्यापार बढ़ाएं।
आज जहां एक आम आदमी दिन भर में 200 रुपये खर्च करता है वहीं एक शराब माफ़िया 15000 दिन भर में खर्च करता है। एक शराब माफ़िया जब कहीं पहुंचता है तो छुप के नहीं रहता बल्कि उसके पैर छूने और पूजने वाले उसको तगड़ी तवज्जो देते हैं।
एक हलवाई की दुकान में एक तरफ यदि आम आदमी बैठा हो और एक तरफ शराब माफ़िया बैठा हो तो आम आदमी की औकात एक कुत्ते के बराबर होती है और दुकानदार के लिए शराब माफ़िया ही देवतुल्य होता है। ऐसे कई उदाहरण हैं जो यह बताते हैं कि शराब माफ़िया होना को घाटे का सौदा नहीं जब नेता से लेकर अधिकारी और पूरा का पूरा थाना ही बिकने के लिए तैयार खड़ा हो।
अब आइये आपको बताते हैं कि कैसे जब पुलिस मिली होती है तो अवैध शराब के पकड़े जाने का खुलासा कैसे देती है। थाने स्तर पर बैठे बड़े अधिकारियों के ऊपर जिला स्तर से दबाव होता है कि कोई न कोई बड़ा खुलासा करते रहो जिससे मजबूरन वो सेटिंग कर बीच बीच में जिले स्तर पर यह बताते रहते हैं कि उन्होंने अवैध शराब की बरामदगी की है । हालाँकि कई बार तो वह मछलियां पकड़ी जाती हैं जो थाने को उनका हिस्सा नहीं देती हैं। भ्रष्टाचार में डूबे हुए पुलिसकर्मियों को ईमानदारी दिखाने में बहुत मजा आता है। पुलिस वाले बड़ी मछलियों को हाथ तक नहीं लगाते हैं।
प्रतापगढ़ जिले के कुंडा, अंतू, रानीगंज, प्रतापगढ़ शहर , संग्रामगढ़, महेशगंज, जेठवारा, मानिकपुर, नबाबगंज, देवसरा आदि थाना क्षेत्रों में कई बार अवैध शराब की बरामदगी दिखाई गई है। कई बार नए आये हुए ट्रेनी दरोगाओं से गलती से शराब पकड़ ली जाती है और वह जिला स्तर पर वायरलेस कर देते हैं और फिर मामला मीडिया में भी आ जाता है तब थाने पर बैठे दलाल दरोगाओं को मजबूरन शराब की बरामदगी दिखानी पड़ती है। अभी हाल में ही पकड़ी गई शराब से भरी ट्रक एक ट्रेनी दरोगा द्वारा की गई गलती का ही नतीजा था।
क्या आपको लगता है कि डीएम व एसपी इसमें लिप्त हैं नहीं ऐसा नहीं है लेकिन उनके ऊपर नेताओं का दबाव रहता है कि बार मजबूरन उन्हें शराब माफ़िया को छोड़ना पड़ता है। जिला स्तर से या प्रदेश स्तर से जब को बड़ी टीम आती है तो शराब माफिया भूमिगत हो जाते हैं। यह तभी निकलते हैं जब मामला मैनेज करवा दिया जाता है।
प्रतापगढ़ जिले में कई जगह शराब फैक्ट्री लगा शराब बनाई जाती है और अभी भी बनाई जा रही है इसमें वहीं लोग ज्यादातर फँस रहे हैं जो नए नए इस धंधे में कूदते हैं। वैसे तो बड़े अनुभव और बड़ी पकड़ व मोटा हिस्सा देने वाले शराब माफियाओं ले लिए प्रतापगढ़ से बेहतर जिला और कोई नहीं हो सकता है।