प्रतापगढ़ के जिला अस्पताल के विवादित सी.एम.एस. का हुआ ट्रांसफर, देखिए क्या है सी.एम.एस. का असली चेहरा - Pratapgarh Samachar

Breaking

गुरुवार, 22 फ़रवरी 2018

प्रतापगढ़ के जिला अस्पताल के विवादित सी.एम.एस. का हुआ ट्रांसफर, देखिए क्या है सी.एम.एस. का असली चेहरा

भ्रष्ट, बेईमान, मानवता को तार-तार करने वाला डाक्टर के रूप में शैतान, श्मशान घाट के डोम से भी गिरा हुआ प्रतापगढ़ जिला अस्पताल (पुरुष) का प्रभारी CMS डॉ प्रेम मोहन गुप्ता का तबादला चित्रकूट जिला अस्पताल के लिए वरिष्ठ परामर्शदाता के पद पर हो चुका है। प्रतापगढ़ समाचार ने कल ही सूत्रों से मिली ख़बर के अनुसार मंत्री नंद गोपाल गुप्ता का हाथ इस सी.एम.एस. का तबादला रुकवाने के लिए लगा हुआ बताया था। कल ख़बर को मंत्री को टैग करते हुए ट्वीट किया गया तो मंत्री ने CMS के ऊपर से अपना हाथ हटाया और जो आदेश 20 दिन पहले ही हो चुका था। उसी रुके हुए आदेश को 22 फरवरी को फिर आदेशित किया गया। जहां तक भुक्तभोगी मरीजों से बात की है तो उन मरीजों का कहना था कि इतना ख़राब और गंदी सोंच का डॉ तो देखा ही नहीं मानवता को शर्मसार करने वाला इंसान डॉक्टर हो ही नहीं सकता। हो सकता है वह शैतान भले हो।
कई लोगों का आरोप है कि मरीजों से पैसा लूटकर वर्षों से प्रतापगढ़ जिला अस्पताल में जमा है यह CMS जिसका नाम है डॉ प्रेम मोहन गुप्ता। इसकी हरकतें देखते ही बनती हैं। इन्हें खुलेआम मुंह पर स्टाफ ही गाली देकर इसे कर देते हैं अपमानित। अपने गलत मानसिकता और घटिया व्यवहार से अपने स्टाफ के हाथ भी पिटा है डॉ. प्रेम मोहन गुप्ता।


आपको बता दें जिला अस्पताल का CMS पद तो बहुत जिम्मेदारी का है लेकिन ग़लत मानिसकता वाला यह प्रेम मोहन तो मानवतावादी है ही नहीं। आपको बता दें कि यह मूलतः सर्जन है और इसके स्वभाव में सिर्फ नीरसपन के अतिरिक्त कोई मानवीय गुण नहीं है। इसके ऊपर यह भी आरोप है कि ऑपरेशन थियेटर में आधा आपरेशन छोड़कर यह मानवरूपी डॉक्टर के भेष में एक दरिंदे के भेष में बाहर आता है और मरीज के तीमारदारों से सौदा करता है कि केस खराब है। पैसा और चाहिये तो ही सफल आपरेशन हो पायेगा। मरीज को फंसाने के बाद ये श्मशान घाट का डोम बन जाता है। इसके दर्जनों दलाल अस्पताल में इसके लिये दलाली करते हैं। यह प्रतापगढ़ को तो छोड़ रहा है लेकिन अब यह जहां भी जाएगा यही करेगा। इसके कुकृत्यों की जांच कर इसके किये की सजा इसे मिलनी चाहिये। योगी सरकार में सही जांच एक बार और कराई जाए जिससे यह दोबारा किसी मरीज को रुपये के लिए कुर्बान न कर सके।