प्रतापगढ़:- समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली (IGRS) की शुरुआत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकारी व्यवस्था से आम जन की शिकायतों और उसके त्वरित निस्तारण के लिए किया था। परन्तु अन्य सरकारी योजनाओं की तरह ही ये भी समय के साथ सिर्फ खानापूर्ति का नाम रह गयी है। अब इसपर शिकायतों का निस्तारण सिर्फ आदेश जारी करने से ही किया जा रहा है।
जनसुनवाई पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत करने पर शिकायतकर्ता को उम्मीद रहती है कि उसकी शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा और उसे न्याय मिलेगा। परन्तु अब इस पोर्टल पर शिकायतों के त्वरित निस्तारण का सबसे सटीक तरीका विभागों ने निकाला है कि मामले में सम्बंधित अधिकारी को निर्देश दे दिया गया है।
सामाजिक संचेतना विकास समिति उ.प्र. की जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत को मुख्यमंत्री के आगमन से पहले 23 अप्रैल को एक आदेश समस्त खण्ड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित करते हुए जारी किया गया, जिसे जिलाधिकारी प्रतापगढ़ को प्रेषित कर प्रकरण को समाप्त करने का अनुरोध BSA प्रतापगढ़ द्वारा किया गया। प्रकरण की रिपोर्ट पढ़कर त्वरित निस्तारण की पोल खुली। कागजी कारवाही के रूप में समस्त खण्ड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि "उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क निर्धारण) अध्यादेश का अनुपालन सुनिश्चित करें। साथ ही शैक्षिक सत्र 2018-19 में छात्रों से ली जाने वाली कक्षावार सम्पूर्ण शुल्क का विवरण एक सप्ताह के अंदर BSA कार्यालय में उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया जिसका कोई फर्क जिले के शिक्षा माफियाओं के ऊपर नहीं पड़ा। सिर्फ शिकायत निस्तारण दिखाने के लिए ये आदेश दिया गया। क्योंकि अगर आदेश पालन के लिए होता तो अब तक इसे अमल में लाया जा चुका होता। वैसे भी मुख्यमंत्री के जिला आगमन के बाद जाते समय बस प्रतापगढ़ बी.एन. सिंह को अपने साथ ही गोरखपुर ले गए और फिलहाल जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से विहीन है।

