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प्रतापगढ़ : एक महिला की भूमि का बैनामा फर्जी तरीके से दूसरे के नाम पर कराने के प्रकरण में में सीजेएम ने प्रतापगढ़ के शाही घराने से आने वाले और जिले के भूतपूर्व सांसद राजा अभय प्रताप सिंह के सुपुत्र राजा अनिल प्रताप सिंह पर केस दर्ज करने का आर्डर दिया है। वहीं इस प्रकरण में माननीय कोर्ट ने राजा अनिल प्रताप सिंह द्वारा दायर की गई एप्लीकेशन को खारिज कर दिया।
शहर के श्यामबिहारी गली रहिवासी सरोज सोनी पत्नी हरीराम सोनी ने चीफ जुडिशल मजिस्ट्रेट कोर्ट में दायर याचिका में बताया था कि 23 सितंबर, 1982 को मकान के साथ जमीन का बैनामा राजा अजीत प्रताप सिंह (राजा अनिल के दादा, जो सांसद भी रहे) ने शिवराम उमरवैश्य के नाम किया था। शिवराम उमरवैश्य द्वारा 13 जनवरी, 1989 को उक्त जमीन का बैनामा याचिकाकर्ता के नाम कर दिया था। उसी जमीन के कुछ हिस्से का बैनामा कैलाशचंद्र केसरवानी ने राजा अजीत प्रताप से कराया था। जिसका बिक्रीनामा कैलाशचंद्र केसरवानी ने 22 जुलाई, 1989 को उसके नाम कर दिया था। तब से उस जमीन पर उसका अभिग्रहण चला आ रहा है।
कुछ दिनों पूर्व सरोज देवी सोनी को यह ज्ञात हुआ कि उसकी भूमि का गलत ढंग से बैनामा राजा अनिल प्रताप सिंह ने 15 मई 2017 को पवन सोनी और किशुन कुमार को कर दिया है। हालकी राजा अनिल को यह बात मालूम थी कि उस जमीन को उनके दादा राजा अजीत प्रताप सिंह ने बेच दिया था। प्रकरण की पेशी के दरम्यान चीफ जुडिशल मजिस्ट्रेट पवन कुमार श्रीवास्तव ने पाया कि फर्जी डाक्यूमेंट्स से पुनः बैनामा किया गया है। इस पर चीफ जुडिशल मजिस्ट्रेट ने शहर के कोतवाल को राजा अनिल प्रताप सिंह उर्फ़ अनिल राजा के अगेंस्ट केस दर्ज करके विवेचना करने का ऑर्डर दिया है।
वहीँ, राजा अनिल प्रताप द्वारा फाइल की गई अर्जी में कहा था कि उस जमीन पर जमींदारी उन्मूलन नहीं हुआ है। इस नाते वह भूमि उनकी हुई। लेकिन कूटरचित और फर्जी डाक्यूमेंट्स से बैनामा करा लिया। पेशी के दौरान चीफ जुडिशल मजिस्ट्रेट ने यह पाया कि जमीन के मालिक की अनुमति के बाद मकान बना कर लोग लम्बे वक्त से निवास करते आ रहे हैं। ऐसे में इस प्रकार के प्रकरण में पर कोर्ट के संज्ञान का कोई हक नहीं बनता है। इस भांति CJM ने राजा अनिल प्रताप सिंह द्वारा दाखिल प्रार्थना पत्र को चीफ जुडिशल मजिस्ट्रेट पवन कुमार श्रीवास्तव ने खारिज कर दिया।
