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| भक्तिधाम मनगढ़ |
कहीं कालिया नाग का वध करते भगवान श्रीकृष्ण, कहीं मां यशोदा की डांट खाकर रोते हुए नंदलाला तो कहीं राधारानी के साथ रास रचाते भगवान मनमोहन, कहीं गोपियों की चीर लेकर पेड़ पर बैठे हुए मुरलीवाले, कहीं पर्वत को उंगली पर धारण किए गोवर्धनधारी, कहीं माखन चुराते नटखट कन्हैया। यह मनमोहक दृश्य था भक्तिधाम मनगढ़ में सजी झांकियों का, यहां जगद्गुरु कृपालु परिषद द्वारा आयोजित जन्माष्टमी समारोह के साक्षी बनने हजारों लोग पहुंचे, सभी के सभी कृष्ण भक्ति में मगन थे। भक्ति मंदिर कई किलोमीटर दूर से ही अपनी आभा व आकर्षण बिखेर रहा था।
शाम 4 बजे से हजारों की संख्या में भक्तिधाम मंदिर परिसर में पहुंच चुके थे। मुख्य प्रवेशद्वार के आसपास वाहन खड़ाकर सभी पैदल भक्तिधाम की तरफ बढ़ रहे थे। महिलाएं, बच्चे, बूढ़े, जवान सभी टोलियों में नजर आ रहे थे। बेहतरीन लाइटिंग की साजसज्जा से मानों धरती पर स्वर्ग उतर आया हो। रात आठ बजे भीड़ को देखते हुए मुख्य प्रवेशद्वार को खोलना पड़ा, क्योंकि इसके पहले मुख्य द्वार के बगल बने छोटे गेट से श्रद्धालुओं को अंदर बाहर किया जा रहा था, लेकिन भीड़ अनिंयत्रित हो जा रही थी ।
जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भक्तिधाम मनगढ़ का मंदिर का पूरा परिसर दुल्हन की तरह सजा था। भीड़ को देखते हुए सीओ कुंडा व कोतवाल कुण्डा सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पीएसी जवानों के साथ तैनात रहे , देर रात दूर दराज से आए लोग राधे-राधे करते टहलते रहे।
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भारी भीड़ देख उड़े पुलिस के होश
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भक्तिधाम मनगढ़ में उमड़ी भारी भीड़ के चलते आमलोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। धाम की सुरक्षा में लगे पुलिस व पीएसी के जवान महज खानापूर्ति व स्वयं मस्ती करते दिखे। रात करीब दस बजे जब भीड़ का लौटना शुरू हुआ तो पुलिस द्वारा बनाया गया चक्रव्यूह टूट गया और मंदिर से पांच किलोमीटर तक लंबा जाम लग गया। जाम ऐसा कि लोगों का पैदल निकलना भी मुश्किल हो गया। लोग गांव की पगडंडियों से निकलकर अपने गंतव्य को जा रहे थे। करीब दो बजे के आसपास जब जाम खुला तो लोगों ने राहत की सांस ली। इस दौरान कुछ छोटे बच्चे जो परिजनों से अलग हो गए थे। उन्हें भक्तिधाम के स्वयंसेवी कार्यकर्ताओं द्वारा उनके परिजनों से मिलाया और कुछ को पुलिस ने मिलवाया,
सख्त रहा जगद्गुरु कृपालु परिषद प्रबंधन
धाम में आई हुई भारी भीड़ को संभालने के लिए पुलिस प्रशासन के अलावा जगदगुरु कृपालु परिषद प्रबंधन भी पूरी तरह सख्त रहा। किसी को भी नियम में ढील नहीं दी जा रही थी चाहे आम आदमी हो या वीआईपी, सबके लिए रूट तय था। भीड़ के चलते मंदिर का सत्संग आडीटोरियम भी दो दिन तक बंद रखा गया है।









