सूख रहा है धान की खेती, बूँद-बूँद के पानी का मोहताज बेल्हा का किसान - Pratapgarh Samachar

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मंगलवार, 12 सितंबर 2017

सूख रहा है धान की खेती, बूँद-बूँद के पानी का मोहताज बेल्हा का किसान


प्रतापगढ़| धान की खेती के सीजन में कुदरत नरमी नही बरत रहा है। मानो कुदरत और किसान में जंग छिड़ी हो। पिछले 20 दिन से सूरज का कहर टूट रहा है। तल्ख धूप व गर्म लू के कारण खेतों मे खड़ी फसल आग से झुलस रही है। खेतों की प्यास को तृप्त करने में कई संसाधन विफल हो रहे हैं। नहरें सूख गई हैं तो बिजली सप्लाई के अभाव में नलकूप भी कुछ ख़ास काम के नही रहे। ऐसे विकत स्तिथि में अन्नदाता किसान अपनी फसल की रक्षा कैसे करें? नहर व नलकूप के पर आश्रित हो कर खेती करने वाले अन्नदाताओ के चेहरे मायूस हो चले हैं। हालात यह है कि सिंचाई के कमी से अब धान की खेती सूखने लगी है। यदि मौसम ने मेहरबानी ना दिखायी तो धान की खेती का बहुत नुकसान हो जाएगा। सप्ताह भर से ज्यादा समय हो गया मगर मेघा हैं कि बरसने को तैयार नहीं हैं। किसान हर रोज सबेरे कड़कती धूप देख बारिश की उम्मीद तक छोड़ चूका हैं। फसल की रक्षा के लिए किसानो को अपनी जेब भी ढीली करनी पड़ रही हैं। एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के आंकड़ों के मुताबित प्रतापगढ़ जिले में 1 लाख 10 हजार हेक्टेयर में धान की खेती की गयी है। नहर के अतिरिक्त प्राइवेट व सरकारी नलकूप से फसलों की सिंचाई का काम किया जाता रहा है। वर्तमान समय में नहर तथा विद्युत् से संचालित होने वाले नलकूप किसानों की आशा पर खरा नहीं उतर रहे। इंजन द्वारा  चलने वाले नलकूप से फसलों की सिंचाई ज्यादा खर्चीला पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त किसान सूख रही खेती को जीवित रखने के खातिर मजबूरी में अपनी जेब ढीली कर रहे हैं। 


अन्य फसलों पर भी मंडरा रहा है खतरा 
बरसात नही होने से धान के अतिरिक्त अन्य फसलों पर भी संकट के बादल मंडरा रहे है। उर्द,, ज्वार, तिली, बाजरा, अरहर, मूंग की पौध भी कड़कती धुप से खेत में झुलसने लगी है। हालत ऐसे ही रहा तो हफ्ते भर बाद फसल सूखने लगेगी। मवेशियों का हरा चारा भी कड़कती धूप की बलि चढ़ने लगा है। 

विद्युत आपूर्ती के अभाव में हांफ रहे प्राइवेट नलकूप 
जनपद में निजी नलकूपों की संख्या लगभग नब्बे हजार है। ज्यादातर किसानों की खेती इन्ही प्राइवेट नलकूपों पर ही आश्रित होती है। स्थिति यहाँ की ऐसी है कि हफ्ते भर से लाइट की कटौती तेज हो गई। रात व दिन मिलाकर केवल चार से छः घंटे भी बिजली ठीक से नही मिल रही है। जो बिजली आपूर्ति की भी जा रही है उसमें कम वोल्टेज की कारण से नलकूप की मोटर ही नहीं चलते है। ऐसे में खेतों की सिंचाई का काम अवरोधित हो रहा है।