एक माह की फीस के लिए तीन सगे भाई और बहनों को स्कूल प्रबंधन ने पूरे दिन स्कूल समय में धूप में खड़ा कर दिया। बच्चे कड़कती धूप में खड़े रोते रहे मगर मजाल था कि स्कूल के मेनेजर का दिल पसीजता। स्कूल प्रबंधन द्वारा इस प्रकार का अजीबोगरीब सजा से बालिका की हालत बहुत बिगड़ गयी। यह कम्प्लेन उनके अभिभावक अमित कुमार पांडेय रहिवासी गारापुर फतनपुर ने जिलाधिकारी से की है। लेकिन अब जब शिकायत डीएम तक पहुँच गयी तो स्कूल प्रशासन परिजनों के आरोपों से पल्ला झाड रहा है।
अमित के मुताबित उनके 3 बच्चे रानीगंज के कूराडीह स्थित बी०आर०टी० एकेडमी में पढ़ते हैं। एक बेटी जिसका नाम श्रेयसी है वो क्लास 6 में, बेटा श्रियांश क्लास 4 और देव पहली कक्षा में पढ़ता है। पिता ने तीनों बच्चों का फीस बीस हजार रुपया इस शत्र में भरा था। मगर बड़ी बेटी श्रेयसी जो ब्रेन ट्यूमर की मरीज है, उसका इलाज संजय गाँधी रिसर्च सेंटर में चल रहा है। बेटी के ब्रेन ट्यूमर के चल रहे इलाज में काफी पैसे खर्च हो गए इस वजह से तीनों बच्चों की सितंबर महीने की फीस 2000 रुपये वो नही भर पाए। जिसके कारण 25 सितंबर को विद्यालय परिसर में उनके सभी बच्चों को कड़कती धूप में खड़ा कर दिया। जिसके बाद श्रेयसी की हालत और बिगड़ गयी। छुट्टी होने पर बच्चे रोते रोते घर वालों से पूरी बात बतायी। इस बार में अभिभावक अमित कुमार पाण्डेय ने मेनेजर से बात की तो उन्होंने कहा कि हमारे विद्यालय का कठोर नियम है। फीस अगर नही जमा करोगे तो ऐसे ही किया जाएगा और अगर फीस नही जमा कर सकते तो स्कूल से निकाल देंगे फिर किसी और जगह पढ़ा लेना अपने बच्चो को"। इतना ही नही आरोप यह भी है कि अमित को जान से ख़त्म करने की धमकी भी दे दी गयी। इस सम्बन्ध में जब स्कूल प्रबंधक रमाकांत तिवारी को फ़ोन किया गया तो उनका बेटा फ़ोन उठाया और कहने लगा कि उका फीस पिछले साल का भी बाकी है। पिछले साल तो उका फीस भी माफ़ किया गया था। बच्चो को धुप में खड़ा करने की सजा से पल्ला झाड कर बेबुनियाद बताया है। अमित ने खुद ही फोन करके फीस मांगने पर जिलाधिकारी से कम्प्लेन कर स्कूल बंद कराने की धमकी दी थी।
