देश भर में जल संरक्षण को लेकर तमाम तरह की योजनाएं बनाई गई हैं। जल संरक्षण समितियों का गठन संसद से लेकर विधानसभा सहित हर जिले में हैं, पर वो वाकई में कितना काम करती हैं ये संदेह के घेरे में है। हर जगह पानी की बर्बादी दिखती है।
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| घण्टों बहता रहा पानी, सरकारी मुलाजिम को कोई परवाह नहीं |
जो तस्वीर आपको दिखाई गई है वह तस्वीर दीवानी न्यायालय परिसर प्रतापगढ़ की है, जहाँ सुरक्षा गार्ड के साथ ही दर्जनों अधिकारी व कर्मचारी रहते हैं। जब तस्वीर ली गयी तो वहाँ सुरक्षा गार्ड तैनात दिखा। टंकी भर जाने के घण्टों बाद भी मोटर बन्द करना किसी को आवश्यक नही लगा, और पानी ओवरफ़्लो होकर बहता रहा। जब व्यवस्था में बैठे लोग ही इस तरह से लापरवाही से संसाधनों का दुरुपयोग करेंगे और पानी को बेकार बह जाने देंगे तो आम लोगों से क्या उम्मीद की जा सकती है। जल संरक्षण के नाम पर प्रत्येक जिले में समितियों की स्थापना हुई है और इनकी मीटिंग में चाय-नाश्तों का ही बिल हजारों में आता है बाकी यहाँ होता क्या है कहने की आवश्यकता नही है। इन समितियों में बस हाय-हैलो का ही काम रह गया है।
विशेष बात इन समितियों में विधायक, सांसद, मंत्रियों आदि की चाटुकारिता और मक्खनबाजी व उनके लिए भीड़ जुटाने व सबसे ज्यादा नारा लगाने वालों को ही स्थान दिया जाता है। अगर योग्य व्यक्तियों को जिम्मेदारी दी जाए तो शायद परिणाम कुछ और हो। आखिर कब तक जनता की गाढ़ी कमाई ऐसे लापरवाह लोगों की अय्याशी के लिये खर्च की जाती रहेगी।
कल बहते हुए पानी, जो बेफजूल बर्बाद हो रहा था उसका वीडियो आपसे फेसबुक पर शेयर किया गया था।
