शोभायात्रा के साथ हुआ दुर्गा मैय्या की प्रतिमाओं का विसर्जन और राम के तीर से ख़ाक हुआ अहंकारी रावण - Pratapgarh Samachar

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रविवार, 1 अक्टूबर 2017

शोभायात्रा के साथ हुआ दुर्गा मैय्या की प्रतिमाओं का विसर्जन और राम के तीर से ख़ाक हुआ अहंकारी रावण


प्रतापगढ़| जिले  में शनिवार को शारदीय नवरात्रों का विजयदशमी के साथ समापन हो गया। भक्तों ने गाजे बाजे के साथ झांकी निकालकर माँ की प्रतिमा का विसर्जित कर दिया। मंदिरों में वैदिक यज्ञ के आयोजन हुए तो दूजी तरफ शोभायात्रा के साथ मां भगवती की प्रतिमाओं का जिले के गंगा, सई और बकुलाही नहीं में में विसर्जन किया गया।
नौ दिनों से घरों में सांझी के रूप में दुर्गा भवानी के नौ रूपों की हो रही पूजा का शनिवार को मूर्तियाँ के विसर्जन के साथ समापन हो गया। माता के भक्तों ने अपने घरों और मन्दिरों में कुंवारी कन्याओं को भोजन कराकर एवं वैदिक यज्ञ के आयोजन कर धार्मिक लाभ उठाया।
दुर्गा मां का विसर्जन करते भक्त 

प्रतापगढ़ में इस बार कई पंडालों में  दुर्गापूजा के मौके पर इको फ्रेंडली प्रतिमाएं स्थापित की गयी थी, जिससे प्रदुषण को काफी हद तक टाला जा सका। इन मूर्तियों के निर्माण में प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए प्लास्टिक व रबर पेंट के बजाए हर्बल रंग का प्रयोग गया था।


नवरात्र के समापन पर स्थापित दुर्गा मूर्तियों के विसर्जन के लिए तैयार किया गया और माता की प्रतिमा का विसर्जन जिले के सई, गंगा और बकुलाही के घाटों पर किया गया। इस दौरान मैय्या को गाजे बाजे के साथ श्रद्धालुओ ने अबीर गुलाल उड़ाते, नाचते, थिरकते प्रतिमा का विसर्जन किया। वही कुंडा क्षेत्र के शाहाबाद घाट, जहानाबाद घाट, कालाकांकर गंगा घाट, हौदेश्वर नाथ घाट में भी माता की मूर्ति का विसर्जन हुआ। कुछ पंडालो की प्रतिमाओ का विसर्जन श्रृंगवेरपुर के गंगा घाट में हुआ। स्थलीय निरीक्षण के बाद प्रतिमा विसर्जन के दरम्यान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गये  थे। घाटों पर पुलिस का बंदोबस्त रहा और कुछ घाटों में नावों के गोताखोरों को लगाया गया था, जो मूर्ति विसर्जन करने वाले लोगों पर विशेष निगरानी रख रहे थे, ताकि किसी भी अप्रिय घटना व अनहोनी होने से बचा जा सके। 
राम के तीर से ख़ाक हुए अहंकारी लंकेश 

सत्य पर असत्य की जीत के रूप में मनाया जाने वाला दशहरा भी बेल्हावासियों ने बड़ी धूमधाम से मनाया।  इस दौरान भगवान राम, लक्ष्मण और सीता राम नेकी झांकी निकाली गयी। शनिवार को भगवान राम ने कई फीट ऊंचे लम्बे रावण के पुतले का दहन कर त्यौहार की परम्परा को निभाया। शोभायात्रा और आतिशबाजी लोगो का आकर्षण का केंद्र रहा।