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बाबागंज, प्रतापगढ़| मजहब का सीधा तात्पर्य होता है, 'आपसी भाईचारा और शांति स्थापित करना।' किसी ने बिककुल सही कहा है कि मज़हब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना। मगर, राजनीति व सत्ता के लोभ में चंद जयचंदो ने इस धर्म शब्द की व्याख्या को ही बदल दिया है। इन सभी के बावजूद वहीं कुछ लोग ऐसे हैं, जो आपसी भाईचारा और सौहार्द्रता को अभी भी तवज्जो देते हैं।
तुम राम कहो, वो रहीम कहें,दोनों की ग़रज़ अल्लाह से है।तुम दीन कहो, वो धर्म कहें,मंशा तो उसी की राह से है।
सन 1931 किसी अज्ञात कवि द्वारा रचित यह पंक्ति प्रतापगढ़ के शकील की सोच को दर्शती है। जी हाँ आपने हैडलाइन बिलकुल सही पढ़ा है। शकील मियां भगवान हनुमान जी मन्दिर निर्माण कराने जा रहे हैं।
प्रतापगढ़ जिले के विकास खंड बाबागंज हेडक्वार्टर के पास स्थित माँ भद्रकाली शक्तिपीठ मंदिर प्रांगण में गुजवर प्रधान शकील अहमद ने रामनवमी के पावन मौके पर वैदिक मंत्रोच्चार के संग बजरंगबली को समर्पित मंदिर के निर्माण के लिए नींव पूजा की। मंदिर निर्माण की आधारशिला रखते हुए शकील मियां कहते है कि धर्म और संप्रदाय के नाम पर जातियों के नाम पर समाज का बंटवारा करना सही नही है। राम और रहीम में कोई भेद नही है। जिस तरह हमारे देह में प्रवाहित रक्त में भेद नही है, उसी तरह अल्लाह हो या भगवान की इबादत और आराधना करने के रास्ते अलग-अलग है।
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| भूमि पूजन करते हुए शकील अहमद |
हम सभी को आपस मे भाईचारे के साथ रहना चाहिए। इसके पहले भी शकील मियां मंदिर परिसर में भैरव बाबा मंदिर, जो निर्माणाधीन है, उसके लिए भी आर्थिक मदद देते रहे है। साथ ही अपने गांव और निकटवर्ती क्षेत्रों में भी सभी धार्मिक कार्यों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते है और अपना सहयोग देते रहे हैं। हनुमान मंदिर के निर्माण में लगने वाले सारे खर्च शकील मियां ही दे रहे है।

