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प्रतापगढ़| मुंबई में सीजेएम पवन कुमार श्रीवास्तव ने 30.90 करोड़ रुपये का दो चेक बाउंस होने के प्रकरण में अश्विन गिरिराज कुमार अग्रवाल पुत्र वेद प्रकाश अग्रवाल जो 302 एकता मेंडोस सिद्धार्थनगर ठाकुर विलेज बोरीवली ईस्ट, मुंबई के निवासी है, को दो वर्ष कारावास की सजा और साथ ही 33.45 करोड़ रुपये के अर्थदंड की सजा मुक़र्रर की है।
रतनमई दिलीपपुर, थाना कंधई के निवासी निवासी लोकपति त्रिपाठी का आरोप है कि उसका अश्विन (निवासी मुंबई महाराष्ट्र) के साथ व्यवसायिक लेनदेन था। व्यवसाय के सम्बन्ध में ही अग्रवाल ने उन्हें दो चेक दिए थे, ज बाउंस हो गये।
लोकपति त्रिपाठी ने एनआइ एक्ट के अंतर्गत सीजेएम अदालत में दायर परिवाद में कहा था कि अश्विन अग्रवाल से उनके व्यवसायिक रिश्ते थे। आश्विन ने ही उसे अपने काम में लगाया था। उसे पैसे लेने व देने की अनुमति दी गई थी। दोनों ने विभिन्न कंपनियों में साथ-साथ काम किया। समझौते के अंतर्गत अश्विन अग्रवाल ने उन्हें दिनांक 25 नवंबर 13 को 30.50 करोड़ रुपये का चेक दिया था। वह चेक प्रतापगढ़ के पंजाब नेशनल बैंक में लगाया गया जहाँ ज्ञात हुआ कि चेकदाता ने चेक की अदायगी अवरोधित कर दी है। इसी प्रकार उसी दिन एक और चेक दिया गया था जो 40 लाख रुपये का था। उसे लखनऊ के आईसीआईसीआई बैंक में लगाया गया तो वहां से भी उत्तर यही मिला कि चेक की भुगतान पर रोक है। चेकदाता का सिग्नेचर में बदलाव है और खाते में पर्याप्त धनराशी नहीं था। इस प्रकार दोनों चेक बाउंस हुए। मामला जब कोर्ट में पहुंचा तो सुनवाई करते हुए सीजेएम ने अश्विन गिरिराज कुमार अग्रवाल को दो साल जेल और 33.45 करोड़ रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड जमा न करने पर तीन-तीन माह की सजा भुगतनी होगी।
