लोक आयुक्त उत्तर प्रदेश के सचिव श्री आर0एन0 पाण्डेय ने कहा है कि प्रदेश में भ्रष्टाचार मुक्त एवं कुप्रशासन मुक्त वातावरण सृजन के लिये आवश्यक है कि लोग अपनी शिकायतें लोक आयुक्त कार्यालय में करे। उन्होने बताया कि वर्ष 1975 में इस प्रदेश में भी उत्तर प्रदेश लोक आयुक्त व उप लोक आयुक्त अधिनियम विधान मण्डल द्वारा पारित होकर 14 सितम्बर 1977 से लागू हुआ। उन्होने कहा कि आम आदमी की शासन के क्रियाकलापो से उत्पन्न होने वाली शिकायतों के निराकरण एवं लोक सेवकों की स्वेच्छाचारिता पर नियंत्रण करते हुये भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की किसी भी प्रजातान्त्रिक प्रणाली वाले देशों के लिये लोक आयुक्त प्रशासन एक अत्यन्त सरल, प्रभावी एवं उपयुक्त संस्था है। आवश्यकता केवल इस बात की है कि पीड़ित प्रदेशवासियों को लोक आयुक्त प्रशासन के बारे में प्रभावी ढंग से जानकारी देने के साथ-साथ इस आशय की मानसिकता भी उत्पन्न की जाये कि प्रदेशवासी विश्वास के साथ अपनी शिकायतों के निराकरण हेतु अथवा लोक सेवकों के भ्रष्टाचार के मामलों को शिकायत के माध्यम से लोक आयुक्त प्रशासन में प्रस्तुत करे। उन्होने अधिकारिता पर चर्चा करते हुये कहा कि उत्तर प्रदेश शासन के समस्त विभाग, सरकारी कम्पनियॉ, सहायक सरकारी कम्पनियॉ, सेवानिवृत्त देयकों के भुगतान, मृतक आश्रित सेवायोजना, विकास प्राधिकरण एवं आवास विकास परिषद, निराश्रित एवं वृद्ध महिलाओं के पेंशन, अनुसूचित जाति व जनजातियो के सेवा सम्बन्धी शिकायते दर्ज करा सकते है। इसके अलावा विधायक, विधान परिषद सदस्य, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायतों तथा अध्यक्ष, जिला पंचायत (ग्राम प्रधान को छोड़कर) के विरूद्ध शिकायत एवं शासकीय लोक सेवकों के सेवानिवृत्त/सेवाकाल में मृत्यु से सम्बन्धित देयकों के प्रकरण से सम्बन्धित परिवाद जो कि शिकायती की श्रेणी में आते है प्रस्तुत किये जा सकते है।
उन्होने बताया कि कोई भी लोक सेवक पद को लाभ पहुॅचाने का प्रयास करता है तो वह कुप्रशासन के अन्तर्गत आता है। लोक सेवा आयोग, निर्वाचन आयोग इनके अन्तर्गत शिकायतें नही दर्ज करा सकते है। सेन्ट्रल गर्वमेन्ट के अन्तर्गत आने वाले शिकायतें दर्ज करायी जा सकती है। यदि आपका केस किसी न्यायालय में चल रहा है तो इसके अन्तर्गत नही आयेगा। यदि किसी सेवानिवृत्त कर्मचारी का फण्ड नही मिल रहा है तो वह कुप्रशासन के अन्तर्गत आता है और शिकायत दर्ज करा सकते है। उन्होने बताया कि मीडिया और जनता के सहयोग के बिना कोई भी कार्य नही किया जा सकता है। उन्होने कहा कि लोक आयुक्त प्रशासन के माध्यम से शिकायतों के निराकरण की कार्यवाही बिना किसी खर्च के शिकायतकर्ता की पैरवी का कार्य प्रशासन स्वयं अपने ऊपर लेकर अपेक्षित कार्यवाही सम्बन्धित विभाग से सुनिश्चित कराता है। कार्यवाही के दौरान समस्त प्रगति से भी परिवादी को पत्राचार के माध्यम से अवगत कराया जाता रहता है।
गोष्ठी में अपर जिलाधिकारी श्री सोमदत्त मौर्य ने लोक आयुक्त श्री आर0एन0 पाण्डेय का आभार व्यक्त करते हुये कहा कि श्री पाण्डेय द्वारा जो बाते बतायी गयी है उनको संज्ञान में लिया जायेगा और इसके बारे में लोगो को जागरूक किया जायेगा जिससे शिकायत से सम्बन्धित लोक आयुक्त अधिनियम के बारे में लोगो को जानकारी प्राप्त हो सके। इस अवसर पर उपजिलाधिकारी सदर पंकज वर्मा, अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी राकेश कुमार सिंह तथा पश्चिमी बसन्त लाल सहित अधिकारी एवं जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।
सोमवार, 12 फ़रवरी 2018
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भ्रष्टाचार मुक्त एवं कुप्रशासन मुक्त वातावरण हेतु लोक आयुक्त से शिकायत करें-आर.एन. पाण्डेय लोक आयुक्त सचिव
भ्रष्टाचार मुक्त एवं कुप्रशासन मुक्त वातावरण हेतु लोक आयुक्त से शिकायत करें-आर.एन. पाण्डेय लोक आयुक्त सचिव
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