माफियागीरी से लेकर अपराध और सारे अवैध कार्य में प्रतापगढ़ अव्वल, लेकिन क्यों ? - Pratapgarh Samachar

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शुक्रवार, 2 फ़रवरी 2018

माफियागीरी से लेकर अपराध और सारे अवैध कार्य में प्रतापगढ़ अव्वल, लेकिन क्यों ?

सभी को पता चल ही गया है कि अपना प्रतापगढ़ जिला बड़े बड़े नेताओं, विधायकों,मंत्रियों और तेज तर्रार अधिकारियों के रहमों करम की वजह से थर्ड क्लास के जिले के तमगे से अपने को उबार नहीं पा रहा है ,लेकिन माफियागीरी से लेकर अपराध और सारे अवैध कार्य जो पैसे और सत्ता के दम पर हासिल होता है, उसमें अपना प्रतापगढ़ अव्वल रहता है। जिले में न पहले राजनीतिक दिग्गजों की भी कमी थी न ही वर्तमान समय में कोई कमी है।
सबसे मजे की बात तो यह है कि प्रतापगढ़ जनपद में पहले तो कोई अधिकारी आना नहीं चाहता और जो प्रतापगढ़ का खारा पानी का स्वाद एक बार ले लेता है,वो जाना नहीं चाहता, है न कमाल की बात। कई अधिकारी इसी स्वाद के चक्कर में प्रतापगढ़ दोबारा आये और उन्हें भले ही दोबारा प्रतापगढ़ सूट न कर रहा हो लेकिन वो आये उनके आने का कारण यह था कि प्रतापगढ़ के खारे पानी के स्वाद ने उन्हें दोबारा आने के लिए विवश किया।
प्रतापगढ़ के खारे पानी का दूसरा अर्थ बड़ी आसानी से प्रतापगढ़ में नौकरी करते हुए लूट खसोट का गोरखधंधा चलता है। वशर्ते उस भ्रष्ट अधिकारी को थोड़ा धैर्य रखते हुए सिर्फ एक फार्मूला याद रखते हुए कि बेईमानी का धंधा बड़ी ईमानदारी से किया जाता है तो उसे प्रतापगढ़ जैसे जिले से कभी मोहभंग हो ही नहीं सकता । कई गैर प्रांत के अधिकारी प्रतापगढ़ में नौकरी कर यहीं बस गए । आखिर कब होगा प्रतापगढ़ का विकास, हम प्रतापगढ़ियों में भी एक गजब की सहनशीलता है ।
भ्रष्टाचार होता रहता है हम सहते रहते हैं। विकास हो या न हो ,सड़क बने या न बने,बिजली आये या न आये, पानी मिले या न मिले, गंदगी रहे या न रहे, नौकरी मिल जाये तो ठीक नहीं तो भी ठीक। किससे कहें भाई विधायक और मंत्री से कहोगे तो उनकी बेइज्जती हो जाती है और अधिकारियों के कान तक बात पहुंचा नहीं सकते और जो कुछ बड़े कद के नेता हैं उनका कद ही इतना बड़ा हो गया है कि एक आम प्रतापगढ़िया उन्हें समझा सके और किसी ने बोल दिया तो नीचे को छुटभैये नेता जीने नहीं देंगे उसे जिंदगी नरक ही समझो । यहां तक कि प्रधान और बीडीसी दो रहपट मार उस आम प्रतापगढ़िया की बोलती बंद कर देंगे। अरे भैया कुछ नहीं होगा जितने दिन प्रतापगढ़ में काटना है काट लो । जो रूख सूखा विकास दिख रहा है उसी में संतोष करो वरना ..... वरना क्या कुछ नहीं इसी विकास में पिछड़े प्रतापगढ़ में ही रहना पड़ेगा कोई नहीं सुनने वाला भाई।