प्रतापगढ़ जिले में खाद की कालाबाजारी हमेशा से रही है। चाहे प्रशासन कितना भी प्रयास कर ले कहीं न कहीं अधिकारियों की मिलीभगत से कालाबाज़ारी चरम पर रहती है। इसे ही रोकने और पारदर्शिता लाने के लिए शासन ने आदेश जारी किया है। बिना आधार नम्बर के किसानों को साधन सहकारी समिति और दुकानों से खाद नहीं मिलेगी। बड़ी बात यह है कि समिति व दुकानदार पी.ओ.एस. मशीन से ही खाद की बिक्री करेंगे।
किसानों को सरकार सब्सिडी पर डीएपी व यूरिया मुहैया कराती है। हर बार खाद की तगड़ी कालाबाजारी होती है।जिससे किसानों को डीएपी और यूरिया के लिए भटकना पड़ता है। यदि कोई किसान कम खेती वाला है तो मजबूरन उसे महंगी खाद और डीएपी खरीदनी पड़ती है।कई बार तो खाद के इंतजाम के लिए पैसे न हो पाने से किसानों की बोआई भी पिछड़ जाती है। इस वजह से फसल का उत्पादन प्रभावित होता है।
हर बार की तरह प्रशासन कुछ अच्छा करने का प्रयास करता है लेकिन दलालों के आगे सब विफल है। इसी के चक्कर में शासन ने यह आधार वाला तरीका अपनाया है। इसीलिए अब किसानों को बगैर आधार नम्बर खाद नहीं मिलेगी।
जिला कृषि विभाग की ओर से खाद की बिक्री के लिए सभी साधन सहकारी समिति के सदस्यों को और दुकानदारों को पीओएस (प्वाइंट ऑफ सेल) मशीन दी गयी है जिसका प्रशिक्षण भी कराया गया है।सबसे अच्छी बात यह है कि किसान पीओएस मशीन में अंगूठा लगाकर खाद खरीद सकेंगे। यदि अधिकारी जांच करने आते हैं तो उस दौरान पीओएस मशीन एवं गोदाम के स्टॉक यदि अंतर मिला तो कार्रवाई की जाएगी।
दलालों को इसका तोड़ निकालने में समय लगेगा लेकिन जहां तक प्रतापगढ़ के दलालों की बात है 30 से 50 रुपये में उन्हें अँगूठा लगाने वाले किसान मिल जाएंगे। जिन्हें बस इसी कार्य में दलाल लेंगे। यदि अधिकारी और जनता सजग रहे तो यह योजना सफल हो सकती है।
