प्रतापगढ़ का एक परिवार ऐसा भी जहाँ सभी हैं IAS-IPS - Pratapgarh Samachar

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सोमवार, 7 अगस्त 2017

प्रतापगढ़ का एक परिवार ऐसा भी जहाँ सभी हैं IAS-IPS

फोटो: माधवी, क्षमा, योगेश और लोकेश मिश्रा (IAS-IPS Siblings)
लालगंज तहसील के इटौरी गांव निवासी अनिल प्रकाश मिश्र को एक ही ख्वाहिश थी कि उनके संतान बड़े होकर उनका नाम रोशन करें। हुआ भी यही, चारों ने देश की सर्वोच्च सेवाओं के प्रतियोगी परीक्षा को सफलतापूर्वक उत्तीर्ण किया और आज बड़े-बड़े पदों पर देश की सेवा में है।

PratapgarhSamachar.com रक्षाबंधन के शुभ मौके पर ऐसे ही प्रेरणादायी कहानी लेकर आया है पाठको के लिए। बैंक में नौकरी करने वाले पिता अनिल मिश्रा के चारो संतानों की फर्श से अर्श तक का यह सफ़र इतना आसान नही था। 



जानें इन चारों अधिकारी भाई-बहन के बारे में, कोई कलेक्टर तो कोई आईपीएस 
  • अनिल मिश्रा के चारो बच्चो में से योगेश मिश्रा सबसे बड़े हैं, एक आई०पी एस० अधिकारी हैं। फिलवक्त कलकत्ता में भारतीय आयुध निर्माण में प्रशासनिक ऑफिसर हैं।
  • बहन क्षमा मिश्रा हैं दूसरी नंबर पर, जो भारतीय पुलिस सेवा की अधिकारी  हैं। हाल में कर्नाटक में तैनात हैं।
  • तीसरे नंबर पर हैं माधवी मिश्रा, जिनका चयन पिछले साल ही हुआ था। माधवी झारखंड कैडर की IAS ऑफिसर हैं। वर्तमान में केंद्र सरकार की विशेष प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली में पोस्टेड हैं।
  • चौथे नंबर पर हैं लोकेश मिश्रा, जो IAS अधिकारी हैं। लोकेश का भी सेलेक्शन बहन माधवी मिश्र के साथ पिछले साल ही हुआ था। इस वक्त बिहार के चंपारण जिले में प्रशिक्षण ले रहे हैं।
भाई-बहनों के लिए बने प्रेरणा 
सबसे बड़े भाई योगेश कहते है कि, आईएएस अधिकारी बनने से पूर्व वो सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे और नोएडा में एक कंपनी में नौकरी कर रहे थे। उस टाइम उनकी दोनों बहनें क्षमा मिश्रा और माधवी मिश्रा दिल्ली में प्रशासनिक सेवा परीक्षा की प्रिपरेशन कर रही थीं।''

फोटो में माता पिता के साथ IAS माधवी मिश्रा  
  • "रक्षाबंधन पर्व के एक दिन पहले दोनों के परीक्षा का परिणाम आया और वो अनुत्तीर्ण हो गईं। उसके एक दिन बाद रक्षाबंधन के दिन बहनों से राखी बंधवाने के उनके पास गया और उनका उत्साह बढ़ाया।"
  • ''उस दिन मैंने यह ठान लिया कि सबसे पहले मैं खुद आईएएस बनकर दिखाऊंगा, जिससे अपने भाई-बहनों को प्रेरित कर सकू। फिर प्रिपरेशन स्टार्ट की और प्रथम प्रयास में ही भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयन हो गया। इसके बाद मैंने छोटे भाई-बहनों का परीक्षा उत्तीर्ण करने में गाइड किया।''
  • केवल 2 कमरों का था मकान , गेस्ट आते तो होती थी दिक्कत
  • माधवी कहती हैं, चारों भाई-बहनों की आयु में अंतर बहुत ज्यादा नहीं है। सभी भाई बहन वक दुसरे से एकाध साल छोटे-बड़े हैं। पर बचपन में खेल-खेल में कभी नोक-झोक हुआ करती थी, लेकिन बाद में फिर से हम प्यार से रहने लग जाते थे। 
  • क्षमा बताती हैं, हमारा केवल दो कमरों का मकान था, यदि घर में कोई गेस्ट आ जाता था तो सबको अधिक दिक्कत हो जाती थी और पढ़ाई करने में भी परेशानी होती थी। 
 भाई -बहन हर साल मनाते है एक साथ रक्षाबंधन 

पिता अनिल प्रकाश मिश्र जो ग्रामीण बैंक ढिंगवस में मैनेजर हैं उनके चारों बच्चो में खूबप्यार है। एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विसेस में रहने के दरम्यान भी वो रक्षाबंधन पर एक साथ जरूर इकट्ठा होते हैं।

2014, 2015 और 2016 में गाँव इटौरी आए थे और रक्षाबंधन  यही सेलिब्रेट किया था। इस बार उनके आने में समस्या है, क्योंकि उनके एक बेटे लोकेश की प्रशिक्षण बिहार में जारी है। बड़ी बेटी क्षमा भी कर्नाटका में विशेष ड्यूटी पर तैनात  है।

कुछ यूं  रहा लाइफ  का सफर

योगेश मिश्र ने कहते है कि, हम सभी भाइयों ने अपने मूल पैतृक गाँव लालगंज में बारहवीं तक की शिक्षा ग्रहण की। उसके बाद वो मोतीलाल नेहरू नेशनल टेक्नोलॉजी इंस्टिट्यूट, इलाहाबाद से बी०टेक किया । वहीं सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में नौकरी मिल गई जिसके बाद वो नोएडा चले गए।
साल 2013 में भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी बना। क्षमा ने मास्टर ऑफ़ आर्ट्स तक की पढ़ाई गांव से ही की। उसके बाद उनका विवाह 2006 में पास में रहने वाले सुधीर से हो गई, जो उत्तराखंड में डिस्ट्रिक्ट सप्लाई ऑफिसर थे। उन्होंने भी क्षमा को आगे की पढ़ाई को कंटिन्यू रखने पर बल दिया।
प्रारंभ में क्षमा का चयन 2015 में बतौर डिप्टी पुलिस अधीक्षक हुआ। मगर अगले साल फिर से परीक्षा देने के बाद वर्ष 2016 में वो आई०पी० एस० बन गई।
दूसरी बहन माधवी ने स्नातक लालगंज से ही करने के पश्चात इकोनॉमिक्स से स्नातकोत्तर की डिग्री करने इलाहाबाद विश्वविद्यालय चली गईं। इलाहबाद से पढ़ाई कम्पलीट होने के बाद जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय, दिल्ली में रिसर्च करने के दौरान साल 2016 में उनका चयन आईएएस में हो गया।
सबसे छोटे भाई लोकेश मिश्रा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से रसायन अभियान्त्रिकी करने के बाद राजस्थान के कोटा में एक फर्टिलाइजर कंपनी में जॉब की। वर्ष 2015 में पीसीएस की परीक्षा उत्तीर्ण कर इटावा के ताखा ब्लॉक में खंड विकास अधिकारी के रूप में तैनात थे। लेकिन  फिर प्रशासनिक सेवा का एग्जाम दिया और 2016 में उनका भी IAS में चयन हो गया।