प्रतापगढ़ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अफसरों को शराब माफियाओं पर सख्ती बरतने का आदेश दे रहे हैं। मगर बेल्हा में शराब माफियाओं का राज आज भी बेखौफ चल रहा है। आबकारी विभाग का पूरा संरक्षण शराब माफियाओं को हासिल है। आबकारी विभाग अपनी कार्यवाही का कोटा सिर्फ कच्ची शराब ही पकड़ कर पूरा करता है। जबकि हरियाणा से आई तस्करी के माध्यम से आई नकली शराब के मामले में केवल पुलिस ने ही कुछ कार्रवाई की है। बेल्हा में हर वर्ष में करीब 500 करोड़ रुपये की शराब का व्यवसाय होता है। इसमें सरकारी दारू करीब सौ करोड़ की ही बिकती है। बाकी सारी दारू नकली शराब व हरियाणा से आई तस्करी की दारू से पूरा किया जाता है।
शराब माफियाओं का यह गोरखधंधा कुंडा व किठावर से संचालित होता है। पूरे जिले में दारू की दर्जनों अवैध शराब फैक्ट्रियां हैं। जहां पर केमिकल से नकली दारू बनाई जाती है और नामी गिरामी कंपनियों के ब्रांड के लेबल लगाकर बाजार व सरकारी ठेकों पर बेची जाती हैं । पुलिस ने कई बार ऐसी नकली दारू की फैक्ट्रियां को पकड़ा हैं। आबकारी विभाग ने तीन दिन में केवल कच्ची शराब ही पकड़ी है । शासन की सख्ती से इन दिनों आबकारी विभाग अवैध शराब बनाने व बेचने वालों के खिलाफ अभियान चलाने को मजबूर है। लेकिन आबकारी विभाग नकली व हरियाणा से शराब की तस्करी करने वाले शराब के बड़े माफियाओं पर तो हाथ डाल नहीं रहा है । तीन दिनों के अभियान में आबकारी विभाग ने केवल कच्ची दारू बनाने वालों को ही पकड़ा है। इसी के आंकड़े बढ़ा-चढ़ाकर आबकारी विभाग अपना कोटा पूरा करने में लगा हुआ है । सरकारी राजस्व को चूना लगाकर जिले के शराब माफियाओं ने जिले में अन्य जगहों पर अकूत संपत्ति बनाई है। महंगे वाहनों में चलने का शौक रखने वाले इन शराब माफियाओं में सोने की मोटी चेन, ब्रांडेड शर्ट-पैंट, महंगे जूते पहनने व आईफोन रखने एवं असलहाधारी सुरक्षाकर्मियों को लेकर चलने का शौक है। इन माफियाओं ने बड़े शहरों में प्लाट व फ्लैट भी ले रखा है ।