आलू एवं तिलहनी फसलों में कीट के प्रकोप से किसान भाई अपने फसल को बचाये - Pratapgarh Samachar

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सोमवार, 8 जनवरी 2018

आलू एवं तिलहनी फसलों में कीट के प्रकोप से किसान भाई अपने फसल को बचाये



जिला कृषि रक्षा अधिकारी जर्नादन ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से अवगत कराया है कि जनपद में गिरते हुये तापमान के साथ-साथ आर्द्रता बढ़ने के कारण रबी की फसलों में कीट/रोग के प्रकोप की सम्भावना बढ़ गयी है ऐसी दशा में आलू में पछेती झुलसा, तिलहनी फसलो में मांहूॅ एवं पाला से फसलो के प्रभावित होने की सम्भावना है। आलू में पछेती झुलसा के प्रकोप से बचाव हेतु जिनेब-75 प्रति0 डब्लू0पी0 2 किग्रा0 अथवा कापरआक्सीक्लोराइड 50 प्रति0 2.500 किग्रा0 मात्रा प्रति हेक्टे0 की दर से 600-800 लीटर पानी में घोलकर सुरक्षात्मक छिड़काव करें। तिलहनी फसलों में मांहू के प्रकोप की दशा में किसान भाई एजादिरेक्टीन (नीम आयल) 0.15 प्रति0 ई0सी0 2.500 लीटर प्रति हेक्टे0 की दर से 500 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें, रासायनिक नियंत्रण हेतु डाइमेथोएट 30 प्रति0 ई0सी0 1 लीटर अथवा इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रति0 एस0एल0 350 एम0एल0 प्रति0 हेक्टे0 की दर से 500-600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। जिन क्षेत्रों में तापमान में भारी गिरावट हो रही है वहां पाले से बचाव हेतु खेत में हल्की सिंचाई करें, खेतो के चारों ओर धुंआ कर एवं नर्सरी के पौधों के बचाव हेतु पालीथीन या पुवाल से ढककर रखें।